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अधारताल कबाड़खाना ब्लास्ट मामले में शमीम खान को हाईकोर्ट से मिली राहत



जबलपुर। अधारताल थाना क्षेत्र में हुए भीषण कबाड़खाना ब्लास्ट मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से मोहम्मद शमीम खान को बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने मामले की गहन सुनवाई करने के बाद शमीम खान के विरुद्ध दर्ज एफआईआर और उसके आधार पर जारी पूरी आपराधिक कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश सुनाया है। अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच से स्पष्ट हुआ कि जिस जगह धमाका हुआ, उस रजा मेटल इंडस्ट्रीज स्क्रैप यार्ड का वास्तविक स्वामित्व और पूरा संचालन मोहम्मद फहीम खान के नाम पर दर्ज था। इसके अलावा पुलिस डायरी में शमीम की वहां सीधी संलिप्तता या विस्फोटक से जुड़ाव साबित करने वाला कोई ठोस आधार नहीं मिला।

​अदालत में दस्तावेजों से क्या साबित हुआ

​न्यायालय के समक्ष प्रकरण की पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील कुमार पाण्डेय ने महत्वपूर्ण तथ्य पेश किए। उन्होंने बेंच को अवगत कराया कि शमीम पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से लगातार नागपुर में निवास कर रहे हैं। इस कारण उनका खजरी-खिरिया स्थित रजा मेटल इंडस्ट्रीज के दैनिक व्यापारिक कामकाज से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वास्ता नहीं रहा। 25 अप्रैल 2024 को घटित इस भीषण हादसे में स्क्रैप यार्ड के भीतर एलपीआर खमरिया से लाया गया अनुपयोगी व डिमोलिश सैन्य बारूद असुरक्षित ढंग से रखा हुआ था, जिसमें अचानक आग लगने से भयानक विस्फोट हो गया था। उस दर्दनाक घटना में भोला राम भूमिया और मोहम्मद खलील की मौके पर जान चली गई थी, जबकि 2 अन्य श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए थे।

​अन्य आरोपियों पर जांच और कानूनी ट्रायल जारी

​अधारताल पुलिस थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 513/2024 के तहत पुलिस ने शमीम सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाते हुए विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध किया था। पूरे मामले की न्यायिक समीक्षा उपरांत हाईकोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड पर याचिकाकर्ता के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम अथवा लापरवाही के सीधे साक्ष्य अपर्याप्त हैं। हालांकि अदालत ने अपने फैसले में यह अत्यंत महत्वपूर्ण व्यवस्था दी कि यह राहत सिर्फ याचिकाकर्ता मोहम्मद शमीम खान तक ही सीमित रहेगी। इस निर्णय का लाभ मामले में नामजद अन्य सह-आरोपियों को बिल्कुल नहीं मिलेगा। पुलिस प्रशासन एवं अभियोजन पक्ष बाकी आरोपियों के विरुद्ध विधि सम्मत विवेचना, आरोप पत्र और नियमित कोर्ट ट्रायल को बिना किसी रोक-टोक जारी रख सकेगा।

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