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विद्युत क्रांति : रोशन हुए वनवासी आशियाने, विकास को मिली रफ्तार



जबलपुर। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान से मध्यप्रदेश के जनजातीय इलाकों में रोशनी पहुंच रही है। मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 20 जिलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। 31 अगस्त 2026 तक सामने आई प्रगति बताती है कि डीपीआर के 20,198 घरेलू कनेक्शनों और 119 सार्वजनिक सुविधाओं को मिलाकर कुल 20,317 काम तय थे। इनमें से 9,989 घरों और 21 सार्वजनिक परिसरों सहित कुल 10,010 काम पूरे हो चुके हैं। साथ ही 143 बसाहटों का विद्युतीकरण भी हो गया। दमोह और छतरपुर ने अपने सभी घरेलू और सार्वजनिक काम खत्म कर लिए हैं। नरसिंहपुर, पन्ना और बाकी जिलों में तेजी से काम आगे बढ़ रहा है ताकि हर परिवार को ऊर्जा मिले।

दमोह और छतरपुर ने पूरे किए काम

​विद्युत कंपनी दूरदराज के क्षेत्रों में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। जिन इलाकों में दशकों से अंधेरा था, वहां अब बिजली के खंभे और तार पहुंच चुके हैं। मैदानी स्तर पर तकनीकी दलों की तैनाती से वितरण तंत्र मजबूत हुआ है। ट्रांसफार्मर लगाने और लाइन खींचने के काम समय सीमा में निपटाए जा रहे हैं। प्रशासन की निगरानी से दमोह और छतरपुर लक्ष्य हासिल करने में सबसे आगे रहे। नरसिंहपुर तथा पन्ना जिलों में भी शेष बचे कार्यों को तेजी से निबटाया जा रहा है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि गुणवत्ता से समझौता किए बिना हर बसाहट को ग्रिड से जोड़ा जाए।

जीवन स्तर सुधारने में मददगार बनी ऊर्जा

​इस पहल का सीधा असर ग्रामीणों की दिनचर्या पर दिखाई देने लगा है। घरों में रोशनी होने से बच्चों को पढ़ाई के लिए रात में बेहतर माहौल मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर चलने वाले छोटे कुटीर उद्योगों और कृषि से जुड़े उपकरणों को चलाने में सुविधा होने लगी है। अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक भवनों जैसी सार्वजनिक जगहों पर विद्युत तंत्र सक्रिय होने से बुनियादी सेवाएं बेहतर हुई हैं। सुरक्षित विद्युत नेटवर्क तैयार होने से आदिवासी भाई-बहनों का जीवन आसान बना है। सामाजिक और आर्थिक तरक्की के नए रास्ते खुल रहे हैं। कंपनी बचे हुए सभी निर्माण कार्यों को जल्द पूरा करने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें कर रही है।

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