जबलपुर। माँ वैष्णोदेवी यात्रा सेवा समिति द्वारा तपोमूर्ति सद्गुरुदेव बाबा कल्याणदास जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं अध्यक्षता में उदासीनाचार्य भगवान चन्द्राचार्य जी महाराज का 532वां प्राकट्योत्सव आज भक्तिभाव से मनाया गया। कल्याणिका तपोवन में धर्मध्वजा आरोहण, विशेष पूजन, अरदास, कन्या-पूजन, कन्या-भोज एवं प्रसादी भंडारा हुआ। सायंकाल मानस भवन राइट टाउन में आयोजित भजन संध्या में जगद्गुरु नरसिंह दास जी, साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी, रमेश प्रकाश जी, जगदीश आनंद, स्वामी हर्षो दास जी महाराज, स्वामी राघव आनंद जी, स्वामी धोनी दास जी महाराज, स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज, संचालक सांवल दास खत्री, सोनू बचवानी तथा सहयोगी वासुदेव खत्री सांवल, शंकर लाल खत्री, शमन दास आसवानी, सुधीर भागचंदानी, बबलू केसरवानी, अर्जुन पुरुस्वानी, पप्पू जयभोले, तारु खत्री, सुरेश आसवानी, अजीत मिनोचा, दीपक मेहता, महेश पुरुस्वानी, तारु केसवानी एवं मनोहर खत्री उपस्थित रहे।
त्याग और सदाचार से सुधरेगा समाज का भविष्य
सायंकालीन सत्र में संतों के उद्बोधन हुए। जगद्गुरु नरसिंह दास जी ने बताया कि चन्द्राचार्य जी महाराज का संपूर्ण जीवन त्याग, निस्वार्थ सेवा और लोक कल्याण के लिए समर्पित रहा। उनका मार्ग आज की पीढ़ी को भटकाव से बचाकर उच्च मानवीय आदर्शों से जोड़ता है। साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ऐसे वृहद धार्मिक अनुष्ठानों से पूरे समाज में संस्कारों का बीजारोपण होता है, आपसी सद्भाव बढ़ता है तथा जन-जन में आध्यात्मिक चेतना का मजबूत संचार होता है। इसी क्रम में रमेश प्रकाश जी ने रेखांकित किया कि महान संतों की दी गई सीख वर्तमान समय में भी जनमानस को सत्य, आत्मसंयम और सदाचार के पवित्र पथ पर अग्रसर रहने की दिशा दिखाती है।
दुर्लभ रुद्राक्ष पाकर श्रद्धालु हुए भावविभोर तथा निहाल
सभागार में जगदीश आनंद, स्वामी हर्षो दास जी महाराज, स्वामी राघव आनंद जी, स्वामी धोनी दास जी महाराज एवं स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज ने उपस्थित विशाल जनसमूह को अपना मंगलमय आशीर्वचन प्रदान किया। इस दौरान साध्वी मनीषा जी ने श्रद्धापूर्वक मंगल पाठ संपन्न कराया। मंच संचालन की जिम्मेदारी सांवल दास खत्री ने कुशलतापूर्वक निभाई, जबकि कार्यक्रम के अंत में सोनू बचवानी ने सभी संतों और आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। सभा के उपरांत कल्याणिका तपोवन की ओर से लाया गया दुर्लभ रुद्राक्ष सभी भक्तों को प्रसाद रूप में वितरित किया गया। इस पूरे आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान करने में समिति के समर्पित सदस्यों वासुदेव खत्री सांवल, शंकर लाल खत्री, शमन दास आसवानी, सुधीर भागचंदानी, बबलू केसरवानी, अर्जुन पुरुस्वानी, पप्पू जयभोले, तारु खत्री, सुरेश आसवानी, अजीत मिनोचा, दीपक मेहता, महेश पुरुस्वानी, तारु केसवानी तथा मनोहर खत्री ने सक्रिय भूमिका निभाई।

