जबलपुर। नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर से संबद्ध पशुपालन पत्रोपाधि महाविद्यालय मुरैना में पढ़ने वाले झाबुआ के गरीब आदिवासी छात्र तुलसीदास राणा का भविष्य संकट में घिर गया है। मजदूर पिता तोलसिंह राणा के बेटे तुलसीदास की माता गंभीर रूप से बीमार हो गईं, जिसके कारण इलाज में पूरा पैसा खर्च हो गया और वह सत्र 2024-25 के चौथे सेमेस्टर की तय फीस नहीं भर सका। छात्र ने 5 अगस्त 2026 को मुरैना प्राचार्य को आवेदन देकर पंजीयन कराने की गुहार लगाई थी। प्राचार्य ने उसी दिन पत्र क्रमांक 42 से इसे जबलपुर स्थित संचालक पशुपालन पत्रोपाधि पाठ्यक्रम को भेज दिया। अब 1 माह बीतने के बाद भी मुख्यालय से कोई राहत नहीं मिली, जिससे छात्र का अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा देना मुश्किल हो गया है।
लाचारी ने छीन ली बेटे की पूरी पढ़ाई
तुलसीदास के घर का खर्च पिता की दैनिक मजदूरी से चलता है और जरूरत पड़ने पर वह स्वयं भी मजदूरी करने जाता है। दो वर्षीय डिप्लोमा के चौथे सेमेस्टर का दाखिला शुरू होने के दौरान मां की गंभीर बीमारी के इलाज में घर की पूरी जमा पूंजी खत्म हो गई। पूर्व के 3 सेमेस्टर अच्छे अंकों से पास करने के बाद डिग्री की आखिरी दहलीज पर फीस न भर पाने से छात्र की पढ़ाई रुक गई। मुख्यालय स्तर पर मामला लंबे समय तक लंबित रहने पर छात्र ने विश्वविद्यालय के संचालक पर जानबूझकर उपेक्षा और भेदभाव करने का आरोप लगाया है। छात्र का कहना है कि आर्थिक विपन्नता के कारण उसे जानबूझकर परीक्षा से दूर रखा जा रहा है।
महाविद्यालय प्रबंधन ने गिनाए पुराने नियम कायदे
शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज कैंपस अंबाह रोड स्थित मुरैना संस्थान के अनुसार चौथे सत्र की सामान्य प्रक्रिया 27 अप्रैल 2026 से आरंभ हुई थी। 6 कार्यदिवस विलंब शुल्क की तय मियाद खत्म होने पर फोन से संपर्क करने पर छात्र ने रुपये न होने की जानकारी दी थी। संस्थान ने 11 मई 2026 को पत्र क्रमांक 74 जारी करके छात्र से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था, लेकिन कोई लिखित उत्तर नहीं मिला। इसके अलावा छात्र निर्धारित कक्षाओं में भी उपस्थित नहीं हुआ। संस्थान ने छात्र की ताजा अर्जी को संचालक कार्यालय के पत्र क्रमांक 1440 के संदर्भ में सीधे मुख्यालय भेजा, क्योंकि तय नियमों में छूट देने का वैधानिक अधिकार केवल विश्वविद्यालय स्तर पर ही है।
आयोग पहुंचे छात्र ने दी अनशन चेतावनी
जबलपुर मुख्यालय से कोई दिशा-निर्देश न आने पर पीड़ित छात्र ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। आयोग को भेजे पत्र में छात्र ने लिखा कि निर्धन वर्ग से संबंध रखने के कारण उसकी मानवीय समस्या की अनदेखी की जा रही है। अगर विलंब शुल्क लेकर पंजीयन की विशेष अनुमति नहीं मिली, तो उसका 1 शैक्षणिक वर्ष पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। छात्र ने साफ चेताया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल फैसला लेकर प्रवेश पत्र जारी नहीं किया, तो वह जबलपुर पहुंचकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेगा।
