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अफसरशाही के चक्रव्यूह में उलझा कर्मचारियों का हक,आक्रोश



जबलपुर
। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की हठधर्मिता और प्रशासनिक स्तर पर हुए तबादलों को रद्द करने के खिलाफ मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ लामबंद हो गया है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कर्मचारियों को उनके वैधानिक लाभों से वंचित रखा जा रहा है। इसी सिलसिले में जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय, जिला सचिव देवेंद्र पचौरी, कोषाध्यक्ष आलोक अग्निहोत्री, नरेश शुक्ला, प्रशांत सोंधिया, इन्द्रप्रताप यादव, संध्या पाठक, बृजेश मिश्रा, शैलेश गौतम, राजू मस्के, अरुण पटेल, छवि कांत कोरी, पंकज दुबे, रवि बांगड़, प्रियांशु शुक्ला, बीरेंद्र चंदेल, एस पी बाथरे, सुशील गुप्ता, अर्जुन सोमवंशी और राजा राम डेहरिया ने एकजुट होकर संभागीय आयुक्त को विस्तृत शिकायती पत्र सौंपने और मनमानी करने वाले जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई की मांग उठाई है।

​रुकी तरक्की और स्कूलों में पसरा भारी संकट

​विभाग में 35 वर्ष की बेदाग सेवा पूरी करने वाले कर्मियों को चतुर्थ क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ नहीं मिल सका है। सहायक ग्रेड 3 संवर्ग के लिपिकों को सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण न होने का बहाना बनाकर क्रमोन्नत वेतनमान तथा पदोन्नति से रोका जा रहा है। दफ्तरों में अनुकंपा नियुक्ति की फाइलें धूल फांक रही हैं। सरकारी स्कूलों में सफाई कर्मियों और चपरासियों के पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण शैक्षणिक व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल द्वारा 19 जून 2025 को जारी निर्देश के तहत पदोन्नति की प्रक्रिया अमल में नहीं लाई गई। इतना ही नहीं, जिले के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों की जमीनों पर असामाजिक तत्वों का अवैध कब्जा जमा हुआ है।

​अस्पताल बिल अटके और वेतन कटौती से आक्रोश

​दफ्तरों द्वारा कर्मचारियों को उनकी सेवा पुस्तिका तथा पासबुक की छायाप्रतियां उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। हर महीने मिलने वाली वार्षिक कटौती और जमा जीपीएफ पर्ची का वितरण पूरी तरह बंद पड़ा है। वार्षिक सेवा सत्यापन के लिए वित्तीय वर्ष के अंतिम मार्च माह वाले पदस्थ कार्यालय के आधार पर ही गोपनीय चरित्रावली लिखी जानी चाहिए। मोबाइल नेटवर्क या तकनीकी खराबी के चलते ई-अटेंडेंस दर्ज न होने पर कर्मियों को गैरहाजिर मान लिया जाता है, जबकि उस दिन उपस्थिति मानकर वेतन जारी होना आवश्यक है। साथ ही कर्मियों के इंडोर बाह्य रोगी चिकित्सा बिलों का भुगतान तय समय सीमा में न होने से पीड़ित परिवार अपना समुचित उपचार कराने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

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