जबलपुर। नगर निगम प्रशासन अपने मुख्यालय और सभी संभागीय कार्यालयों में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की दैनिक संख्या तय करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक नगरीय सीमा में अब तक बिना किसी निर्धारित सीमा के यह काम किया जाता रहा है, लेकिन पूर्व में सामने आई धांधली की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नई गाइडलाइन का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। दूसरी ओर नागरिक मंच से जुड़े पदाधिकारियों ने इस संभावित पहल का विरोध करने की रूपरेखा तैयार कर ली है। उनका स्पष्ट तर्क है कि जन्म या मृत्यु की घटनाएं पूर्व निर्धारित आंकड़ों के अनुसार नहीं होती हैं, लिहाजा प्रशासनिक स्तर पर प्रमाण पत्रों के प्रमाणीकरण के लिए कोई संख्या तय करना व्यावहारिक नहीं होगा।
धांधली रोकने के लिए तय होगी दैनिक सीमा
नगर निगम के उच्च पदस्थ अधिकारियों के अनुसार इस नई व्यवस्था का मुख्य मकसद व्यवस्था में पूरी तरह पारदर्शिता लाना है। पिछले कुछ समय से प्रमाण पत्रों के सत्यापन और निर्माण कार्य में अनियमितताओं की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं खामियों को दूर करने के लिए मुख्यालय से लेकर हर जोनल कार्यालय के स्तर पर कार्यक्षमता और लक्ष्य की सीमा तय करने की रूपरेखा बनाई जा रही है। प्रशासनिक अमले का मानना है कि निर्धारित संख्या के भीतर कार्य होने से दस्तावेजों की गहन जांच संभव हो सकेगी, जिससे फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी।
डिजिटल सिस्टम के बावजूद नए आदेश से हलचल
वर्तमान समय में इस पूरी प्रक्रिया को काफी हद तक कंप्यूटरीकृत कर दिया गया है, जिससे तकनीकी तौर पर गड़बड़ी की संभावना पहले ही बेहद कम हो चुकी है। इसके बावजूद नए प्रतिबंध लगाने की सुगबुगाहट ने निगम के गलियारों से लेकर आम जनता के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। नागरिक संगठनों का मानना है कि इस तरह की बंदिशों से लोगों को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अनावश्यक चक्कर काटने पड़ेंगे। आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा कि यह कवायद धरातल पर कितनी कारगर साबित होती है।
