खजरी खिरिया में गहराया बड़ा बिजली संकट, दिन में 15 बार ट्रिपिंग से फैक्ट्रियों में हाहाकार, कारोबारियों की जेब पर पड़ा दोहरा वित्तीय भार
जबलपुर। शहर के खजरी खिरिया औद्योगिक क्षेत्र में भारी भरकम कमर्शियल कनेक्शन लेने के बाद भी बिजली कंपनी की घोर लापरवाही से व्यापारी वर्ग त्रस्त हो चुका है। दिनभर में 10 से 15 बार अघोषित बिजली कटौती होने से कामकाज पूरी तरह ठप हो रहा है और रोज 33 केवी लाइन में खराबी का बहाना बनाया जाता है। जनरेटर चलाने के कारण कारोबारियों को रोजाना लाखों रुपये का महंगा डीजल फूंकना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिजली का भारी भरकम बिल भी लगातार चुकाना पड़ रहा है। स्थानीय मैदानी लाइनमैन मोहन ठाकुर अपनी मनमर्जी से ड्यूटी पर आता-जाता है और शिकायतों पर समय मिलने पर आने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेता है। इस गंभीर समस्या को लेकर जब इलाके के सहायक यंत्री यानी एई संतोष पुतते से सीधी बात की गई तो उन्होंने तकनीकी खराबी का कारण पता न होने की बात कही और केवल जल्द सुधार का खोखला आश्वासन थमा दिया। लंबी पूंजी फंसाकर व्यापार चला रहे निवेशक स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं, क्योंकि कई स्तरों पर शिकायतें भेजने के बाद भी जिम्मेदार अमला दफ्तरों में बैठकर कुर्सियां तोड़ रहा है।
डीजल के भारी खर्च से टूटी कारोबारी कमर
कारखानों और दुकानों में विद्युत आपूर्ति बाधित रहने से उत्पादन कार्य घंटों रुका रहता है। काम को पटरी पर बनाए रखने के लिए विवश होकर जनरेटर सेट चालू रखने पड़ते हैं। रोजाना ड्रमों के हिसाब से ईंधन की खपत हो रही है, जिससे निर्माण लागत में अनापश्यक वृद्धि दर्ज हो रही है। बाजार में प्रतिस्पर्धा के दौर में यह अतिरिक्त वित्तीय भार मुनाफे को लील रहा है। तैयार माल की डिलीवरी अटकने से बाहरी खरीददार आर्डर निरस्त करने लगे हैं। एक तरफ आपूर्ति शून्य है, दूसरी ओर खपत बिल शत-प्रतिशत थमाया जा रहा है।
लाइनमैन की तानाशाही से आम उपभोक्ता बेहाल
इलाके में तकनीकी खराबी दूर करने का जिम्मा जिस मैदानी अमले पर है, उसका रवैया पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना बन चुका है। खंभों और तारों में खराबी आने पर सूचना देने के बावजूद घंटों कोई झांकने नहीं पहुंचता है। जब भी फोन के जरिए संपर्क साधा जाता है तो टालमटोल भरा रुख सामने आता है। क्षेत्रीय वितरण व्यवस्था पूरी तरह कर्मचारियों की व्यक्तिगत सुविधानुसार संचालित की जा रही है। फील्ड स्टाफ की इस मनमर्जी के चलते छोटे-बड़े सभी वाणिज्यिक संस्थान लाचार अवस्था में खड़े नजर आते हैं।
अधिकारियों की चुप्पी से गहराया प्रशासनिक गतिरोध
संभागीय कार्यालय में बैठे उच्च पदस्थ अभियंताओं को जमीनी जमीनी हकीकत का जरा भी इल्म नहीं है। सबस्टेशन स्तर पर शिकायतों की डायरी भर चुकी है, मगर फाइलों को आगे बढ़ाने की जहमत कोई नहीं उठा रहा है। तकनीकी खामियों की सही पहचान करने के बजाय हर बार प्राकृतिक आपदा अथवा लोड शेडिंग की मनगढ़ंत कहानी पेश कर दी जाती है। नियामक आयोग के तय मानकों का खुला उल्लंघन करते हुए निरंतर आपूर्ति के दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता समाप्त हो चुकी है।
भारी पूंजी निवेश के बाद फैला गहरा निराशावाद
नई इकाइयों की स्थापना के दौरान 24 घंटे निर्बाध बिजली का भरोसा दिलाकर भारी राशि जमा कराई गई थी। बुनियादी ढांचे के नाम पर केवल जर्जर केबल और पुराने ट्रांसफार्मर थमा दिए गए। वोल्टेज के लगातार उतार-चढ़ाव से संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक मशीनें और मोटरें जलकर खाक हो रही हैं। पूंजी डूबने के खौफ से उद्योगपति अब अपने विस्तार प्रोजेक्ट रोक रहे हैं। व्यवस्था में सुधार न होने की स्थिति में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी :गिरिया
यह बहुत गंभीर मामला है कि दिन में 10 से 12 बार लाइट ट्रिपिंग हो रही है। जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। उपभोक्ताओं की परेशानी जल्दी दूर होगी।
एसके गिरिया,चीफ इंजीनियर
