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बरगी बांध के चार नए गेट खुलते ही तटवर्ती बस्तियों में अलर्ट,देखें वीडियो




जबलपुर
। बरगी बांध के जलग्रहण क्षेत्र में निरंतर बारिश से रविवार सुबह 11 बजे प्रबंधन ने 4 अतिरिक्त गेट खोल दिए। अब कुल 17 गेटों से औसतन 2.36 मीटर ऊंचाई से 6136 क्यूमेक पानी प्रति सेकंड नर्मदा नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। सुबह जलाशय का जलस्तर 423.06 मीटर पहुंच गया, जो पूर्ण क्षमता 422.76 मीटर से अधिक है। निकासी बढ़ने से बांध के सामने बने पुल पर 10 फीट ऊपर पानी बह रहा है। जल संसाधन विभाग एवं स्थानीय प्रशासन ने नर्मदा के विभिन्न घाटों पर जलस्तर 8 से 10 फीट तक बढ़ने की आशंका जताई है। तटवर्ती क्षेत्रों, बस्तियों व निचले कछारों में सतर्कता बरतने के साथ सतत निगरानी रखी जा रही है।

​उफनती नर्मदा के कछारी इलाकों में अलर्ट जारी

​भारी जल निकासी के बाद नर्मदा नदी का प्रवाह प्रचंड रूप ले चुका है। ग्वारीघाट, तिलवाराघाट, भेड़ाघाट, लम्हेटाघाट, जिलहरीघाट और सारसवाही समेत सभी प्रमुख तटों पर पानी तेजी से सीढ़ियों को पार कर ऊपर चढ़ रहा है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे स्नान या दर्शन के लिए गहरे पानी की तरफ न जाएं। पुलिस जवानों एवं होमगार्ड के गोताखोरों की टीमों को विभिन्न घाटों पर तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटा जा सके। कछारी गांवों के कोटवारों और पंचायत प्रतिनिधियों को लगातार मुनादी कराकर लोगों को नदी से दूर सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर रहने की ताकीद दी जा रही है। पशुपालकों को भी अपने मवेशियों को तटवर्ती चरागाहों में न ले जाने के निर्देश दिए गए हैं।

​कंट्रोल रूम से बांध सुरक्षा तंत्र सक्रिय हुआ

​जलग्रहण वाले पर्वतीय क्षेत्रों में बादलों के सक्रिय रहने से आगामी घंटों में आवक और तेज हो सकती है। इसी को ध्यान में रखकर परियोजना के तकनीकी विशेषज्ञ प्रति घंटे जल आवक तथा भराव का बारीक गणित लगा रहे हैं। मंडला, डिंडोरी और अमरकंटक के ऊपरी कैचमेंट से लगातार आ रहे पानी के दबाव को संतुलित करने के लिए गेटों के हाइड्रोलिक सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। कंट्रोल रूम से जबलपुर, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, रायसेन और सीहोर जिलों के प्रशासनिक नियंत्रण कक्षों को समय-समय पर पानी के डिस्चार्ज का आधिकारिक डेटा साझा किया जा रहा है। राजस्व अमले को निर्देश दिए गए हैं कि यदि पानी खेतों या बस्तियों तक पहुंचता है तो प्रभावित परिवारों को तत्काल पास के राहत शिविरों अथवा शासकीय भवनों में स्थानांतरित किया जाए।

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