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मोटर साइकिलों से शराब की होम डिलीवरी, आबकारी अमले ने साधी चुप्पी



जबलपुर। जिले के बरेला परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों में नशा मुक्ति अभियान 2.0 का कोई प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा है। आबकारी नियमों को ताक पर रखकर शराब माफिया मोटर साइकिलों के जरिए सीधे देहात के गांवों तक मदिरा की अवैध खेप पहुंचा रहे हैं। तय दुकानों के बजाय गलियों में मनमाने दाम पर शराब बिकने से युवा वर्ग तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है, जिसके चलते क्षेत्र में चाकूबाजी, मारपीट और लूटपाट जैसी आपराधिक वारदातें लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय बाशिंदों अनंतराम पटेल, योगेश पटेल, अशोक उपाध्याय, ज्ञान लाल यादव, सुरेंद्र चौधरी, बाल गोविंद तिवारी, अभिलाप उपाध्याय, ताराचंद पटेल, सुरेश पटेल, ऋषि पासी और नेमचंद बरकड़े ने पुलिस तथा प्रशासन से इस अवैध नेटवर्क को फौरन ध्वस्त करने की मांग उठाई है।

दुकानों से सीधे गांवों में उतर रही पेटियां

​सरकारी नियमों के मुताबिक मदिरा की बिक्री केवल अधिकृत परिसरों से ही की जा सकती है, लेकिन बरेला क्षेत्र के ठेकों से जुड़े सप्लायरों ने आसपास के देहाती इलाकों में अपने स्थायी अवैध अड्डे स्थापित कर लिए हैं। तस्कर दोपहिया वाहनों की मदद से संकरी गलियों और खेतों की पगडंडियों से शराब की पेटियां बस्तियों तक पहुंचा रहे हैं। तय कीमत से अधिक दाम वसूलकर कालाबाजारी करने वाले ये गिरोह भारी मुनाफा बटोर रहे हैं, जिससे ग्रामीण बस्तियों में असुरक्षा और अशांति का माहौल गहराता जा रहा है।

मूकदर्शक बने महकमे के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी

​ग्रामीणों द्वारा बार-बार सटीक सूचनाएं साझा करने के बावजूद आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन ठोस कदम उठाने से बच रहा है। अमले की इसी लापरवाही के चलते बेखौफ तस्कर बिना किसी डर के अपना नेटवर्क चला रहे हैं। उमरिया कुडारी सहित आसपास के ग्रामीणों का साफ कहना है कि सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर असर दिखाएं। यदि प्रशासन ने समय रहते इस तस्करी पर पूर्ण विराम नहीं लगाया, तो पूरे क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगी।

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