जबलपुर। जिले की राजस्व सीमा में स्थित गोसलपुर, मझौली, सिहोरा और मझगवां क्षेत्रों में खनिज माफिया द्वारा प्रशासनिक नुमाइंदों व सफेदपोश रसूखदारों से सांठगांठ कर बेरोकटोक अवैध उत्खनन जारी है। मानसून के इस दौर में बालू के अतिरिक्त डोलामाइट, कच्चा पत्थर, बॉक्साइट, हार्डस्टोन, आयरन ओर, ब्लू डस्ट, गिट्टी और मुरम जैसी बेशकीमती प्राकृतिक संपदा को बड़े पैमाने पर खुर्दबुर्द किया जा रहा है। इन इलाकों में मेजर मिनरल्स क्रेशर सहित गौण खनिज की 100 से अधिक खदानें संचालित हैं, जिन्हें शासन ने नियमों के तहत लीज पर दिया था। निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी माइनिंग विभाग की होने के बावजूद ठेकेदार भारी मुनाफा कमाने के फेर में खनन नियमों को ताक पर रखकर अंधाधुंध खुदाई कर रहे हैं। सरकारी खजाने को भारी चपत लगाने वाले इस पूरे अवैध धंधे पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा पूर्व में गठित स्पेशल टास्क फोर्स भी पूरी तरह निष्क्रिय साबित हो चुकी है।
खदानों पर सुरक्षा बोर्ड तक नहीं लगाए गए
माइनिंग एक्ट के अंतर्गत सभी स्वीकृत खदानों के चारों तरफ सुरक्षा फेंसिंग लगाना अनिवार्य होता है। स्थल पर चेतावनी बोर्ड लगाकर उसमें खदान की वास्तविक गहराई, लंबाई, चौड़ाई, स्वीकृत लीज की अंतिम समय सीमा, ठेकेदार का पूरा नाम तथा लीज पंजीयन संख्या की स्पष्ट जानकारी दर्ज की जानी चाहिए। इसके साथ ही खदान कार्यस्थल पर मजदूरों की सुरक्षा हेतु प्राथमिक उपचार पेटी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का वैधानिक प्रावधान है। जमीनी हकीकत यह है कि माफिया दस्तावेजों में पकड़े जाने से बचने के लिए इन सभी नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर रहे हैं।
घनमीटर पैमाइश शून्य होने से राजस्व को नुकसान
स्वीकृत सीमा के भीतर जमीन से कितने घनमीटर कच्चा माल बाहर निकाला गया, इसकी सटीक निगरानी के लिए कोई सुदृढ़ व्यवस्था लागू नहीं की गई है। बिजली, पर्यावरण और मजदूर सुरक्षा के तय मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। जिम्मेदार महकमों के अधिकारियों की मौन सहमति के चलते खनन माफिया बिना किसी वैधानिक अनुमति के बॉक्साइट, मुरम और लौह अयस्क का विपुल भंडार निकाल रहे हैं। वास्तविक उत्पादन का रिकॉर्ड न होने से शासन को करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व की सीधी हानि हो रही है।
रात के अंधेरे में पोकलेन से पहाड़ी हो रही छलनी
मझौली तहसील अंतर्गत गोसलपुर थाना क्षेत्र की जिस पहाड़ी पर 2 माह पूर्व अवैध खनन का प्रकरण उजागर हुआ था, वह स्थान दोबारा माफिया के निशाने पर आ चुका है। रात के सन्नाटे का लाभ उठाकर हिताची व जेसीबी मशीनों द्वारा पहाड़ी के पत्थरों को काटकर सैकड़ों टन अयस्क खुले में जमा कर लिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार भारी मशीनों से की जा रही इस खुदाई के बाद अब माल को बड़े हाइवा वाहनों में भरकर चोरी-छिपे अन्यत्र परिवहन करने की योजना बनाई जा रही है।

