जबलपुर। जिले की बरेला तहसील स्थित ग्राम पंचायत डूंगा-महँगाव में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना की बदहाली से सैकड़ों परिवारों की जान जोखिम में पड़ चुकी है। गांव के घरों में पिछले 1 सप्ताह से टोटियों के जरिए बदबूदार, मटमैला पानी और रेंगते हुए जिंदा कीड़े आ रहे हैं। इस दूषित जल के निरंतर उपयोग से मासूम बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। स्थानीय निवासी दीपक पटेल, अनिल पटेल और राज पटेल ने बताया कि ग्राम पंचायत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पीएचई और सीएम हेल्पलाइन 181 पर लगातार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी 30 किमी दूर मुख्यालय में बैठे अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया। नालियों के पास से गुजरी घटिया पाइपलाइन के जोड़ टूटने से सीवरेज का गंदा पानी नलों में खिंच रहा है। कागजी दावों और तकनीकी अमले की अनदेखी ने पूरे इलाके को महामारी की दहलीज पर खड़ा कर दिया है।
नालियों की गंदगी खींच रही जमीन में दबी घटिया पाइपलाइन
ठेकेदारों द्वारा जमीनी सतह पर घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किए जाने से पाइपलाइन के आंतरिक जोड़ पूरी तरह खुल गए हैं। नालियों के समानांतर गुजरने की वजह से गटर का बदबूदार कीचड़ रिसकर नलों तक पहुंच गया है। बर्तनों में भरते ही कुछ ही मिनटों में मैल की मोटी परत बैठ जाती है, जिससे खाना बनाना और नहाना असंभव हो चुका है। परिवार के सदस्य लगातार उदर विकार, उल्टी-दस्त तथा चर्म रोगों से परेशान हो रहे हैं। शुद्ध पेय जल का अभाव होने के कारण अब घरों के चूल्हे तक जलना बंद हो गए हैं और बाशिंदों के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट आ गया है।
अधिकारियों की बेरुखी से शिकायतों की फाइलें बंद पड़ी रहीं
ग्रामीणों की चीख-पुकार के बावजूद अब तक रासायनिक अमले ने जलस्रोतों की शुद्धता परखने के लिए नमूनों का परीक्षण नहीं किया है। पोर्टल पर दर्ज कराई गई तकनीकी आपत्तियों को मौके पर जाए बिना ही दफ्तरों में बंद कर दिया गया। विभागीय अमला केवल जिम्मेदारी का आदान-प्रदान कर अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। प्रतिदिन पसीना बहाकर जीविकोपार्जन करने वाले मजदूरों की सुध लेने स्वास्थ्य दल का एक भी कर्मी आज तक नहीं पहुंचा। पूरी व्यवस्था महज औपचारिकता बनकर रह गई है और लोग बेसहारा छोड़ दिए गए हैं।
संकट गहराने पर अब सड़कों पर उतरने की खुली तैयारी
प्यास बुझाने की विवशता में रहवासी चिलचिलाती धूप के बीच दूरदराज के निजी बोरवेलों का रुख कर रहे हैं। भारी वजन उठाकर पानी ढोने से गृहणियों तथा बेटियों का अमूल्य समय नष्ट हो रहा है। बुनियादी जीवन अधिकार छीनने पर उपजा जनआक्रोश अब विस्फोटक मोड़ ले चुका है। आगामी 24 घंटों में स्वच्छ जलापूर्ति का वैकल्पिक प्रबंध सुनिश्चित न होने पर मुख्य मार्ग अवरुद्ध करने का ऐलान हुआ है। निष्क्रिय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से क्षुब्ध युवाओं ने सीधे कलेक्ट्रेट घेरने और बस्ती में तात्कालिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने का संकल्प लिया है।
