जबलपुर। जिला कोषालय में कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के देयकों पर बार-बार आपत्ति लगाकर परेशान करने का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ जबलपुर जिला शाखा अध्यक्ष अटल उपाध्याय के नेतृत्व में देवेंद्र पचौरी, आलोक अग्निहोत्री, विवेक रंजन शुक्ला, बृजेश मिश्रा, सुशील गुप्ता, अर्जुन सोमवंशी, शिवदयाल प्रधान, एस पी बाथरे, रवि बांगड़, राजू मस्के, जी पी द्विवेदी, अरविंद शाहू, संजय रजक, संजय मजूमदार, बलराम रजक और गुलाब कोस्टा ने कोषालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला है। संघ का आरोप है कि अवकाश नगदीकरण, उपादान, जी पी एफ, बीमा, मेडिकल और पेंशन देयकों में नियम विरुद्ध तरकीबें अपनाई जा रही हैं। यदि कोई आवश्यक संशोधन हो तो विभाग केवल 1 बार में ही पारदर्शी तरीके से सभी आपत्तियां दर्ज करे।
कंप्यूटर प्रणाली को दरकिनार कर फाइलें अटका रहे
नियमों के मुताबिक कोषालय में किसी भी देयक में आपत्ति आने पर उसकी प्रविष्टि तुरंत कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज की जानी चाहिए। परंतु जबलपुर जिला कोषालय का अमला कंप्यूटर में प्रविष्टि दर्ज करने के बजाय संबंधित फाइलों को अपने पास ही दबाकर रख लेता है। इस लापरवाही के कारण आपत्तियों का समय पर निराकरण नहीं हो पाता और कर्मचारियों को अपने ही जमा पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। स्थिति यह है कि कर्मचारियों के मासिक वेतन, पेंशन, जी पी एफ, बीमा और मेडिकल बिलों में 4 से 5 बार तक आपत्तियां लगाई जा रही हैं। इस वजह से जिले के सैकड़ों कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारी अपने ही चिकित्सा देयकों के भुगतान के लिए भटक रहे हैं, जिससे उनका समय पर इलाज भी रुक जाता है।
कागजात हटाकर भुगतान रोकने का गंभीर आरोप
कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया है कि देयकों में जानबूझकर बार-बार कमियां निकालकर अनुचित दबाव बनाने का रास्ता निकाला गया है। बिल पास कराने की प्रक्रिया के दौरान फाइलों से जरूरी दस्तावेज अलग कर दिए जाते हैं या फिर राशियों के आंकड़ों में हेरफेर कर दिया जाता है। सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी जीवन भर की कमाई यानी उपादान, अवकाश नगदीकरण और बीमा राशि पाने के लिए दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हैं। बिना आपत्ति लगाए किसी भी बिल को स्वीकृत ही नहीं किया जा रहा है। संघ के प्रतिनिधियों ने मांग रखी है कि कोषालय अमला अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाए। देयकों की जांच प्रक्रिया में एक ही बार में सभी वैध कमियों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया जाए, ताकि कर्मचारी एक ही बार में उनका समाधान करा सकें और उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
