जबलपुर। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने अपने ताप एवं जल विद्युत गृहों की कार्यप्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की दिशा में नया कदम उठाया है। इस उद्देश्य से नयागांव स्थित नवनिर्मित प्रशिक्षण संस्थान में प्रबंध संचालक मनजीत सिंह की अध्यक्षता में 1 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें 15 अभियंताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में निदेशक तकनीकी सुबोध निगम, कार्यपालक निदेशक दीपक कश्यप, अतिरिक्त मुख्य अभियंता संजय कुमार जैन, विवेक बाझल एवं डॉ. अशोक तिवारी सहित आईएसओ मैनेजर नविता ठाकुर और तरंग श्रीवास्तव उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने संयंत्रों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के क्रियान्वयन पर जोर दिया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य बिजली उत्पादन को अधिक सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली से जोड़ना रहा।
बिजली उत्पादन में तय होंगे कड़े वैश्विक मानक
प्रशिक्षण सत्र के दौरान नविता ठाकुर और तरंग श्रीवास्तव ने अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण के मूल सिद्धांतों तथा औद्योगिक लाभों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। अतिरिक्त मुख्य अभियंता डॉ. अशोक तिवारी ने आंतरिक ऑडिट, दस्तावेजीकरण और मानकीकरण की बारीकियों से अभियंताओं को अवगत कराया। संयंत्रों के सुचारू संचालन के लिए 4 प्रमुख मानक तय किए गए हैं। ISO 9001 के जरिए गुणवत्ता प्रबंधन और प्रक्रिया नियंत्रण सुदृढ़ होगा, जबकि ISO 14001 ताप व जल विद्युत संयंत्रों में पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की पहचान व रोकथाम सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त ISO 45001 पावर प्लांट के जोखिमों को घटाकर सक्रिय सुरक्षा संस्कृति विकसित करेगा और ISO 50001 ऊर्जा खपत के विश्लेषण से बिजली की बचत तथा कार्यक्षमता बढ़ाएगा। निदेशक तकनीकी सुबोध निगम ने इन सभी मानकों को अलग-अलग देखने के बजाय एकीकृत प्रबंधन प्रणाली के रूप में लागू करने पर बल दिया।
नए सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट बनेंगे अधिक आधुनिक
जबलपुर स्थित शक्ति भवन मुख्यालय के सभी दफ्तर पूर्व में ही यह प्रमाणन हासिल कर चुके हैं। अब प्रबंधन का ध्यान चालू संयंत्रों के साथ चचाई और सारनी में प्रस्तावित नई सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत इकाइयों की कार्यप्रणाली को वैश्विक स्तर पर ढालने का है। प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि युवा अभियंताओं की तकनीकी दक्षता और ऊर्जा के दम पर यह व्यवस्था स्थापित होगी। इसे केवल एक औपचारिक उपलब्धि न मानकर दैनिक कार्यशैली में उतारा जाएगा, जिससे प्रदेश के सभी विद्युत गृह अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय, कुशल और पर्यावरण अनुकूल बन सकेंगे।
