मप्र हाई कोर्ट ने 18 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने के दिए निर्देश
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने वन विभाग द्वारा शासकीय अधिवक्ता उपलब्ध होने के बावजूद निजी वकील के जरिए पुनर्विचार याचिका दायर करने के मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने इस पर नाराजगी जताते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक को 18 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होकर जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। यह पूरा मामला सतना जिले की वन समितियों में कार्यरत 25 दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान दिए जाने से जुड़ा हुआ है। हाई कोर्ट ने 22 सितंबर 2022 को अपने फैसले में इन 25 श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान का भुगतान करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। इस आदेश के खिलाफ वन विभाग ने हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में यह तथ्य आया कि शासन स्तर पर पैनल और शासकीय अधिवक्ता उपलब्ध होने के बाद भी विभाग ने निजी वकील के माध्यम से पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। अदालत ने इसे प्रशासनिक नियमों की अनदेखी मानते हुए विभाग के सर्वोच्च अधिकारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा है।
