जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मेडिकल यूनिवर्सिटी के विभाजन और इसके 250 करोड़ रुपए के फंड के गैर कानूनी बंटवारे के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोल दिया है। जिसके तहत जबलपुर और उज्जैन में अलग अलग मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाई जानी हैं। इस संबंध में मंच की ओर से डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन तथा प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग भोपाल को रजिस्ट्रार डॉ. पुष्पराज सिंह के माध्यम से औपचारिक आपत्ति भेजी गई है। इस महत्वपूर्ण आपत्ति प्रक्रिया के दौरान डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, यशवंत कोष्टा, अशोक यादव, श्याम सोलंकी और एड. ब्रजेश साहू प्रमुख रूप से उपस्थित रहे हैं। 20 जुलाई को जारी राजपत्र सूचना के बाद से यह पूरा संवेदनशील मामला तूल पकड़ चुका है और लगातार व्यापक चर्चा में बना हुआ है।
कृषि और मेडिकल यूनिवर्सिटी बंटवारे में हुई साजिश
मंच का यह स्पष्ट आरोप है कि कुछ साल पहले जब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी का विभाजन किया गया था तब जबलपुर और ग्वालियर दोनों को ही बराबर के हिस्से दिए गए थे। लेकिन इसके विपरीत वर्तमान में मेडिकल यूनिवर्सिटी के नए विभाजन में नियमों को दरकिनार कर बराबर के दो हिस्से नहीं किए गए हैं। इसमें एक बड़ा हिस्सा उज्जैन को सौंप दिया गया है जबकि जबलपुर के हिस्से में बहुत छोटा हिस्सा ही आया है। यह सब कुछ जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के साथ एक सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है। इसके पीछे मुख्य मंशा यह है कि आने वाले आगामी वर्षों में जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी भारी आर्थिक बदहाली के दौर से गुजरे और अपने अस्तित्व को हमेशा के लिए खो बैठे। इस स्थिति के बाद पूरे प्रदेश में मात्र एक ही मेडिकल यूनिवर्सिटी बचेगी जो कि केवल उज्जैन की ही बनी रह सकेगी।
250 करोड़ फंड का बंटवारा पूरी तरह अवैध
इस महत्वपूर्ण आपत्ति में इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि 20 जुलाई को क्रमांक 207 तथा 210 के अंतर्गत मध्य प्रदेश राजपत्र में एक आधिकारिक सूचना प्रकाशित की गई थी। इस प्रकाशित सूचना के अनुसार आने वाले समय में जबलपुर और उज्जैन में दो अलग अलग मेडिकल यूनिवर्सिटी संचालित होंगी। हैरानी की बात यह है कि मेडिकल यूनिवर्सिटी के मूल एक्ट में आज तक कहीं पर भी ऐसा कोई संशोधन नहीं किया गया है जिसके तहत मूलधन का बंटवारा किया जा सके। यही वजह है कि वर्तमान जबलपुर यूनिवर्सिटी के पास मौजूद 250 करोड़ रुपए के रिजर्व फंड का बंटवारा करना पूरी तरह से गैर कानूनी और असंवैधानिक कृत्य है। इस पूरी आपत्ति को दर्ज कराने के अवसर पर अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे। इस दौरान डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, यशवंत कोष्टा, अशोक यादव, श्याम सोलंकी और एड. ब्रजेश साहू की गरिमामयी उपस्थिति दर्ज की गई। यह संपूर्ण घटनाक्रम 6.8.2026 को सामने आया है।
