केवल छोटे कर्मियों पर कार्रवाई से उठ रहे सवाल,दैनिक सत्यापन न होने से हुआ करोड़ों का नुकसान
जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में 1.63 करोड़ रुपए का बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। इस पूरे मामले में कैश शाखा से जुड़े 5 कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है। संस्थान के वर्तमान लेखा अधिकारी द्वारा पुराने रिकॉर्ड की जांच और टैली सॉफ्टवेयर में दर्ज आंकड़ों का भौतिक मिलान किए जाने के बाद इस फर्जीवाड़े की असलियत सामने आई। इस लंबे समय तक चले गबन के दौरान कॉलेज में 3 वित्तीय अधिकारी भी पदस्थ रहे थे, जिनकी भूमिका अब तक जांच के दायरे से बाहर है। अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि वर्षों तक सरकारी खजाने की निगरानी करने वाले जिम्मेदार उच्च अफसरों की अनदेखी और लापरवाही पर कानूनी कार्रवाई कब होगी।
दैनिक रोकड़ और बैंक खातों का मिलान छूटा
सरकारी कार्यप्रणाली के नियमों के तहत संस्थान में प्रतिदिन आने वाले वित्तीय राजस्व का पूरा लेखा-जोखा रखना जरूरी होता है। इसके तहत मरीजों की मनी रसीद, रोकड़ बही और बैंक में जमा पर्चियों का नियमित सत्यापन होना चाहिए था। कॉलेज प्रशासन ने वर्षों तक नकद प्राप्त राशि और बैंक बैलेंस शीट का मिलान नहीं कराया। प्रत्येक माह के अंत में बैंक स्टेटमेंट और लेजर की पड़ताल न होने के कारण यह बड़ा नुकसान लगातार बढ़ता चला गया।
सॉफ्टवेयर ऑडिट से खुली फर्जीवाड़े की पूरी पोल
मौजूदा लेखा अधिकारी ने सिस्टम में सुधार के लिए कंप्यूटर डाटा और फाइलों की आंतरिक पड़ताल शुरू की। टैली में दर्ज एंट्री की जांच से पता चला कि कागजों पर दिखने वाली रकम बैंक खातों में पहुंची ही नहीं थी। पूर्व के वर्षों में किसी भी स्तर पर क्रॉस चेकिंग न होने से यह खेल चलता रहा। अब पुलिस जांच पर सभी की निगाहें हैं कि क्या इस संस्थागत विफलता में तत्कालीन अधिकारियों से भी पूछताछ होगी।
