पुलिस अधिकारियों के अनुसार रामसिंह व रानू नंदा के बीच प्रेम संबंध रहे, जिसके चलते दोनों एक दूसरे से मिलते रहे। यहां तक कि रानू रामसिंह से शादी करना चाहती थी, लेकिन शादीशुदा होने के कारण रामसिंह शादी करने के लिए तैयार नहीं था। रानू द्वारा शादी के लिए दबाव बनाए जाने से परेशान होकर रामसिंह ने रानू को जबलपुर लेकर जाकर हत्या करने की साजिश रची। 25 जुलाई को रानू घर से भागकर रामसिंह के पास आ गई। दोनों मंडला से नागपुर पहुंचे,यहां पर रुककर दोनों साथ में घूमते फिरते रहे। कुछ दिन बाद 3 अगस्त को रानू को लेकर रामसिंह जबलपुर आ गया। साजिश के तहत वह रानू को भेड़ाघाट ले गया, यहां पर बात नहीं बनी तो तिलवारा क्षेत्र में लेकर आ गया। यहां भी रामसिंह अपने मसंबों में कामयाब नहीं हुआ। इसके बाद रामसिंह रानू को लेकर नैनपुर पहुंच गया, नैनपुर में रामसिंह का दोस्त चंद्रशेखर भी साथ में शामिल हो गया। रामसिंह प्लान के मुताबिक 7 अगस्त को डुंगरिया-बहेगा के बीच बैहंगा के जंगल पहुंच गए। यहां पर रामसिंह ने रानू को धोखे से कीटनाशक पिला दिया। कीटनाशक का शरीर पर असर होते ही रानू को बेहोशी छा गई। तभी रामसिंह ने रानू की दुप्पटा से गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद रानू के शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इधर रानू के अचानक लापता होने से परिजन चितिंत रहे उन्होने अपने स्तर पर तलाश की लेकिन कोई जानकारी न मिलने पर थाना महाराजपुर मंडला में शिकायत की। इस बीच पुलिस को खबर मिली कि जंगल में महिला का शव जली हुई हालत में मिला है। परिजनों द्वारा शिनाख्त किए जाने के बाद पुलिस ने जांच शुरु कर दी। जांच के दौरान खबर मिली कि रानू को रामसिंह के साथ देखा गया है, जिसपर पुलिस ने रामसिंह को सरगर्मी से तलाश करते हुए बीती शाम हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने रानू की हत्या करना स्वीकार किया। रामसिंह ने बताया कि इस घटनाक्रम को अंजाम देने में उसके दोस्त चंद्रशेखर की भी भूमिका रही। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से मृतका के चांदी के जेवर, सोने का मंगलसूत्र, तीन सोने की पत्तियां, घटना में प्रयुक्त मोटर साइकल, कीटनाशक की डिब्बी व कपड़े बरामद किए।