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चार जिलों के हजारों वाहन गायब, फिर भी मिल रहे फिटनेस प्रमाण पत्र



जबलपुर। कटंगी बाईपास स्थित खजरी खिरिया के पास ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन यानी एटीएस की शुरुआत मार्च 2025-26 में की गई थी। इस स्वचालित केंद्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जबलपुर, मंडला, डिंडोरी और नरसिंहपुर जिले के सभी पंजीकृत कमर्शियल वाहनों जैसे बस, ट्रक, हाइवा और ऑटो की पारदर्शी एवं आधुनिक यांत्रिक जांच करना था। निर्धारित नियमों के अनुसार संभाग के इन सभी 4 जिलों के वाहनों को भौतिक परीक्षण के लिए करौंदा बाईपास क्षेत्र स्थित इस केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य था। जमीनी हकीकत यह है कि इन चारों जिलों के अधिकांश वाहन मालिक बिचौलियों और दलालों से सांठगांठ करके वाहनों को केंद्र तक लाए बिना ही कागजों पर फिटनेस प्रमाण पत्र हासिल कर रहे हैं। केंद्र पर प्रतिवर्ष लगभग 30000 व्यावसायिक वाहनों की जांच का अनुमान था, लेकिन वर्तमान में महज 10000 वाहन ही पहुंच रहे हैं, जिससे पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है।

दलालों के खेल से नियम कायदे दरकिनार

​परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गई आधुनिक प्रणाली बिचौलियों के नेटवर्क के कारण बेअसर साबित हो रही है। जबलपुर, मंडला, डिंडोरी और नरसिंहपुर के वाहन संचालक फिटनेस परीक्षण की कड़ी प्रक्रिया से बचने के लिए दलालों को मोटा नजराना दे रहे हैं। एजेंटों के माध्यम से वाहन को मौके पर पेश किए बिना ही कागजी खानापूर्ति कर फिटनेस पास करा ली जाती है। कई वाहन मालिक स्थानीय केंद्र में आए बिना अन्य संभागों से सांठगांठ कर दस्तावेज बनवा रहे हैं, जिससे आधुनिक जांच व्यवस्था का बुनियादी ढांचा निष्प्रभावी हो चुका है।

निगरानी के अभाव में बढ़े सड़क हादसे

​मैनुअल व्यवस्था में होने वाली गड़बड़ियों को समाप्त करने के लिए ही स्वचालित जांच केंद्र की शुरुआत की गई थी, ताकि अनफिट गाड़ियां सड़कों पर न दौड़ सकें। विभागीय अधिकारियों की ढिलाई और जमीनी जांच के अभाव में यह नई व्यवस्था भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। तकनीकी रूप से अयोग्य, खटारा और भारी वाहन बिना किसी भौतिक पड़ताल के सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। यह स्थिति यात्रियों और राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रही है और मार्ग दुर्घटनाओं में लगातार इजाफा कर रही है।

सालाना लक्ष्य से बेहद दूर स्वचालित केंद्र

​कटंगी बाईपास केंद्र की स्थापना के समय यह तय किया गया था कि संभाग भर के हजारों वाहनों का नियमित परीक्षण यहीं होगा। वास्तविक आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल 30000 भारी एवं हल्के व्यावसायिक वाहनों के आने की क्षमता के मुकाबले सिर्फ 10000 वाहन ही परीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं। शेष 20000 वाहनों का भौतिक रूप से केंद्र पर न आना यह स्पष्ट करता है कि नियम केवल फाइलों तक सीमित रह गए हैं और जमीनी स्तर पर व्यापक सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

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