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उफान पर नर्मदा का वेग, भेड़ाघाट और धुआंधार जलमग्न होने से अलर्ट

 



जबलपुर। जबलपुर के साथ-साथ मंडला और डिंडोरी जिलों में हुई मूसलाधार बारिश का व्यापक असर जबलपुर की जल संरचनाओं पर साफ नजर आने लगा है। ऊपरी क्षेत्रों से भारी आवक के चलते नर्मदा और हिरण नदियां पूरे उफान पर बह रही हैं। सुरक्षा और जल प्रबंधन को देखते हुए बरगी बांध के 13 गेट 2.15 मीटर तक खोल दिए गए हैं, जिनसे करीब 3300 क्यूमेक पानी लगातार डिस्चार्ज किया जा रहा है। इस निकासी से नर्मदा में 5000 क्यूमेक पानी की आमद दर्ज हुई है, जिसके कारण ग्वारीघाट, तिलवारा घाट, भेड़ाघाट और विश्वप्रसिद्ध धुआंधार जलप्रपात पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। ग्वारीघाट के तटवर्ती क्षेत्रों में पानी दुकानों की छतों तक पहुंच चुका है। दूसरी तरफ कटंगी क्षेत्र में हिरण नदी का जलस्तर बढ़ने से गनयारी और हिनोता के छोटे पुल 5 से 8 फीट जलमग्न हो गए हैं, जिससे इंद्राना और मझौली का सीधा सड़क संपर्क टूट गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ग्वारीघाट तथा भेड़ाघाट में 1-1 बोट के साथ 6-6 होमगार्ड जवान तैनात किए गए हैं, जबकि बनारस से बुलाई गई एनडीआरएफ टीम को मुख्यालय में मुस्तैद रखा गया है।

तटवर्ती इलाकों में प्रशासन ने बढ़ाई कड़ी निगरानी

​जबलपुर संभाग के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश के बाद जल संसाधन विभाग लगातार बांध के कैचमेंट एरिया की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हालांकि पिछले 24 घंटों की तुलना में पानी की तेज आवक की गति थोड़ी धीमी पड़ी है, जिससे बांध प्रबंधन ने फिलहाल अतिरिक्त फाटक न खोलने का निर्णय लिया है। निचले इलाकों में पानी के फैलाव को रोकने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए तटवर्ती बस्तियों में मुनादी कराई जा रही है। नर्मदा के प्रमुख घाटों पर पानी सीढ़ियों को पार कर ऊपर बने सार्वजनिक परिसरों तक चढ़ आया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे उफनते जलस्तर के नजदीक न जाएं और सुरक्षा घेरे का कड़ाई से पालन करें। पुलिस बल निरंतर गश्त कर लोगों को गहरे पानी वाले संवेदनशील स्थलों से दूर रहने की हिदायत दे रहा है।

पुल जलमग्न होने से कई मार्ग बंद

​नदी के विकराल स्वरूप का सबसे गहरा प्रभाव कटंगी तहसील के ग्रामीण अंचलों में देखने को मिल रहा है। रपटा पुलों के ऊपर पानी का तेज बहाव होने के कारण क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्कूली विद्यार्थियों, दैनिक कामकाज के लिए शहर जाने वाले मजदूरों और दूध-सब्जी विक्रेताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने के लिए मरीजों को अब 15 से 20 किलोमीटर का लंबा चक्कर काटकर गंतव्य तक जाना पड़ रहा है, जिससे समय के साथ-साथ ईंधन का अतिरिक्त खर्च भी बढ़ गया है। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और राजस्व अमले ने दोनों पुलों के पहुंच मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी है ताकि कोई भी वाहन चालक जान जोखिम में डालकर बहते पानी के बीच से निकलने की कोशिश न करे।

आपदा से निपटने के लिए बचाव दल तैनात

​संभावित खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र को 24 घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। होमगार्ड के तैराक जवान लाइफ जैकेट, रबर बोट और जरूरी बचाव उपकरणों के साथ प्रमुख घाटों पर लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। विशेष तौर पर भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियों और ग्वारीघाट के संवेदनशील किनारों पर विशेष निगरानी चौकियां बनाई गई हैं। किसी भी विकट परिस्थिति या अचानक जलस्तर में बढ़ोतरी होने पर एनडीआरएफ की एक्सपर्ट टीम तुरंत मोर्चा संभालने के लिए तैयार है। जिला प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी करते हुए सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में बने रहने का आदेश दिया है।

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