छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर के शासकीय स्कूल में छात्राओं का टॉयलेट इस्तेमाल करने पर प्राचार्य को निलंबित कर दिया गया है. कलेक्टर के जांच प्रतिवेदन पर सागर कमिश्नर ने यह कार्रवाई की. मामला ईशानगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है. यहां छात्राओं ने जनसुनवाई में कलेक्टर से शिकायत की थी कि प्राचार्य महिला शौचालय का इस्तेमाल करते हैं और मना करने पर कई तरह की धमकियां देते हैं.
ईशानगर के शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य बसन्तलाल प्रजापति को स्कूल में छात्राओं का टॉयलेट इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई सागर संभाग के कमिश्नर अनिल सुचारी ने कलेक्टर छतरपुर के जांच प्रतिवेदन पर की है.
कमिश्नर सागर संभाग के आदेशानुसार, प्राचार्य बसन्तलाल प्रजापति का यह कृत्य शासकीय दायित्वों के निर्वहन में घोर स्वेच्छाचारिता, अनुशासनहीनता और पद के दुरुपयोग का प्रतीक है. यह म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के उपनियम का सीधा उल्लंघन है. म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 09 के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है.
कलेक्टर ने शिकायत मिलते ही करवाई मामले की जांच
जनसुनवाई में मिली शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर मृणाल मीणा के द्वारा इस पूरे मामले की जांच करवाई गई और सही पाए जाने पर सागर कमिश्नर को निलंबित के लिए पत्र भेजा गया था. यह पत्र, जांच प्रस्ताव के आधार पर संयुक्त संचालक लोक शिक्षण सागर संभाग द्वारा 15 जुलाई 2026 को प्राचार्य बसन्तलाल प्रजापति के खिलाफ शिकायतों के आधार पर भेजा गया था.
जांच समिति को मिली थीं गंभीर अनियमितताएं
कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी छतरपुर द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में प्राचार्य के खिलाफ कई गंभीर अनियमितताएं और आरोप सिद्ध पाए गए थे. इसमें विद्यालय में पुरुष टॉयलेट उपलब्ध होने के बावजूद प्राचार्य द्वारा बालिकाओं के टॉयलेट का उपयोग किया जाता था. इसके अलावा महिला शिक्षिकाओं और अन्य कर्मचारियों का मानसिक उत्पीडऩ किया जाता था. स्कूल में पदस्थ महिला कर्मचारियों और अन्य स्टाफ को परेशान कर मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जाता था. उनका वेतन रोकना और योजनाओं का लाभ नहीं देने जैसी कई मामलों की शिकायत के बाद जांच की गई थी. जिसमें गंभीर अनियमितताएं मिली थीं.
