बताया जाता है कि गोराबाजार मुख्य मार्ग से लगी बस्ती में शराब दुकान के खोले जाने को लेकर लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, यहां तक कि गोराबाजार बाजार तक बंद किया गया, इसके बाद भी संचालक द्वारा शराब दुकान को नहीं हटाया गया। इसके बाद भी जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो पाया कि उक्त दुकान धार्मिक स्थल से तय दूरी पर नहीं है। लोगों के विरोध को देखते हुए अब जिला प्रशासन व केंट बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है, केंट सीईओ ने नोटिस जारी करते हुए कहा है कि शराब दुकान को दो दिन के अंदर हटाया जाए, यदि दुकान नहीं हटाई गई तो केंट बोड द्वारा तालाबंदी कर सील कर दिया जाएगा। केंट बोर्ड के नोटिस में इस बात का भी उल्लेख है कि आबकारी विभाग द्वारा एफएल बिलहरी टू पीएस बरेला के नाम से शराब दुकान खोलने का लाइसेंस जारी किया गया था लेकिन लाइसेंस धारक आकर्ष जायसवाल ने नियमों का उल्लघंन करते हुए दुकान को गोराबाजार के एक घर में खोल दिया। वहीं गोराबाजार संघर्ष समिति के पवन कनौजिया, नकुल गुप्ता, पवन यादव सहित अन्य लोगों द्वारा ज्ञापन सौंपा गया था, इसके बाद रांझी तहसीलदार ने जांच की तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए थे। दुकान एक मस्जिद से निर्धारित दूरी पर नही थी। इसके अलावा अन्य नियमों को ताक में रखकर दुकान को खोला गया था।