जबलपुर। मध्य प्रदेश में वक्फ बोर्ड के नए गठन की प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जबलपुर स्थित हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव समेत प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगा है। सिवनी निवासी शोएब राजा खान द्वारा दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए अदालत ने 28 सितंबर 2026 को अगली तारीख तय की है। याचिकाकर्ता के वकील हिमांशु मिश्रा ने कोर्ट में 4 जुलाई 2026 की अधिसूचना पर सवाल उठाए। राज्य सरकार के वकील ब्रह्मदत्त सिंह की मौजूदगी में हुई सुनवाई के दौरान आधी रात 1 बजे नोटशीट पर हस्ताक्षर किए जाने की वजह पूछी गई है। पूरे मामले ने प्रशासनिक जल्दबाजी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मध्य सत्र में बोर्ड भंग करने पर आपत्ति
मामले के तथ्यों के अनुसार 3 जुलाई को वक्फ बोर्ड के 4 सदस्यों फैजान खान, डॉ. सनवर पटेल, फातिमा चौधरी और इनाउर रहमान ने अपने पदों से त्यागपत्र दिया था। इसके अगले ही दिन 4 जुलाई को सरकार ने नोटशीट के जरिए इन इस्तीफों को स्वीकार कर लिया। इसके तुरंत बाद बिना किसी विधिवत चुनाव या तय चयन प्रक्रिया का पालन किए पूरे बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया। याचिका में तर्क दिया गया है कि वक्फ अधिनियम की धारा 99 के प्रावधानों के तहत किसी बोर्ड को कानूनी रूप से निरस्त या भंग किए बिना उसके कार्यकाल के बीच में नया ढांचा तैयार नहीं किया जा सकता। इसी प्रक्रियात्मक खामी को आधार बनाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब सारा कामकाज सामान्य घंटों में हो सकता था, तब रात के 1 बजे दस्तखत करने की विशेष परिस्थिति क्यों बनी।
नई कार्यकारिणी में दो गैर मुस्लिम सदस्य शामिल
राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय इस नए निकाय में पहली बार 2 हिंदू सदस्यों को जगह दी गई है। डॉ. सनवर पटेल को इस संस्था का नया अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा सदस्यों के रूप में नजमा हेपतुल्ला, आतिफ अकील, फैजान खान, सिस्टर फातिमा चौधरी, शाइस्ता सुल्तान, शबाना खान, मनोज मालपाणी और अनिमेष भार्गव के नाम शामिल हैं। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त को पदेन सदस्य की जिम्मेदारी दी गई है। हाईकोर्ट ने प्रक्रियागत गड़बड़ियों को देखते हुए मुख्य सचिव के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रमुख सचिव, उप सचिव और वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को नोटिस देकर जवाब तलब किया है। अब 28 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में शासन का रुख स्पष्ट होने के बाद ही आगे का कानूनी रास्ता साफ हो सकेगा।
