जबलपुर। तमिलनाडु के मदुरई शहर में आयोजित एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन्स ऑफ इंडिया यानी एबीएसआई के राष्ट्रीय सम्मेलन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज का नाम रोशन हुआ है। कॉलेज के सर्जरी विभाग की 2 प्रतिभावान रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. डैफ्नी जान और डॉ. प्रीति सबनानी के शोध पत्रों को देश के शीर्ष 5 अवॉर्ड पेपर में स्थान मिला है। इस कठिन प्रतियोगिता में डॉ. डैफ्नी जान ने उत्कृष्ट रिसर्च के दम पर देश भर में 3 स्थान प्राप्त किया है, जबकि डॉ. प्रीति सबनानी ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता में 4 स्थान हासिल किया है। अब इस बड़ी उपलब्धि से पूरे चिकित्सा जगत में हमारे इस प्रतिष्ठित संस्थान का गौरव देश भर में कई गुना बढ़ गया है।
किफायती तकनीक से मरीजों को मिली बड़ी राहत
सर्जरी विभाग की द्वितीय वर्ष की रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. डैफ्नी जान ने अपने शोध में टारगेटेड एक्सिलरी डिसेक्शन एवं सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी की एक अत्यंत किफायती तकनीक दुनिया के सामने प्रस्तुत की है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मेडिकल कॉलेज की यह पूरी टीम इस प्रक्रिया को 100 रुपये से भी कम लागत में पूरी कर रही है, जबकि बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों में इसी चिकित्सीय प्रक्रिया पर 50000 रुपये से अधिक का भारी-भरकम खर्च आता है। इस किफायती और बेहतरीन तकनीक ने चिकित्सा क्षेत्र के बड़े विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है तथा सबको प्रभावित किया है।
एआई तकनीक से स्तन स्वास्थ्य परामर्श हुआ आसान
दूसरी तरफ, डॉ. प्रीति सबनानी ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए स्तन स्वास्थ्य परामर्श को आम जनता के लिए बेहद आसान और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित चैटबॉट पर अपना महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किया। उनके इस आधुनिक शोध को वहां मौजूद सभी चिकित्सा विशेषज्ञों ने खुले दिल से सराहा और इसकी सराहना की। इस राष्ट्रीय मंच पर कॉलेज के वरिष्ठ सर्जन डॉ. संजय यादव ने भी 2 अत्यंत महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किए, जिनसे युवा डॉक्टरों को बहुत कुछ सीखने को मिला और सम्मेलन में सभी ने इनकी प्रशंसा की। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद पूरे कॉलेज परिसर में जश्न का माहौल है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा तथा सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. दीप्तिबाला शर्मा ने पूरी विजेता टीम को दिल से बधाई दी है। इन सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बड़ी सफलता को संस्थान की सामूहिक सफलता और मजबूत शोध संस्कृति का परिणाम बताया है, जिससे आने वाले समय में अन्य छात्रों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी और देश भर में संस्थान का नाम और अधिक रोशन होगा।
