इंदौर. एमपी के इंदौर के पुलिस कमिश्नर ने 700 से अधिक प्रकरणों में फर्जी गवाह बनने वाले पूर्व थाना प्रभारी (टीआई) को सब इंस्पेक्टर (एसआई) के पद पर डिमोट कर दिया है. थाना प्रभारी ने ऐसा कांड किया है कि उनसे एक सितारा छीनते हुए तकरीबन 3 वर्षों के लिए वापस सब इंस्पेक्टर बना दिया गया है.
700 प्रकरणों में फर्जी गवाह पेश करने के आरोप
पिछले दिनों एक फरियादी ने पूर्व थाना प्रभारी की शिकायत पुलिस को की थी, जिसके बाद इस मामले में जांच शुरू हुई. जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए कि पुलिस कमिश्नर ने थाना प्रभारी को सब इंस्पेक्टर के पद पर डिमोट कर दिया. मामला इंदौर के खजराना थाना प्रभारी रहे दिनेश वर्मा का है. पिछले दिनों दिनेश वर्मा की शिकायत इंदौर पुलिस कमिश्नर को की गई थी. पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह को इस बात की जानकारी दी गई थी कि खजराना थाना प्रभारी रहते हुए दिनेश वर्मा ने 700 से अधिक प्रकरण जिसमें दुष्कर्म, हत्या, हत्या के प्रयास, लूट चोरी, सहित तमाम तरह के अपराध दर्ज किए और उन अपराधों में पूर्व निर्धारित मात्र एक या दो गवाह को ही उपयोग में लिया गया, जो की पूरी तरीके से फर्जी गवाह थे.
3 सालों के लिए डिमोशन
जैसे ही इस पूरे मामले की जानकारी इंदौर पुलिस कमिश्नर को लगी तो उन्होंने अपने स्तर पर जांच पड़ताल करवाई. प्रारंभिक तौर पर 700 से अधिक प्रकरण में एक और दो गवाह ही खजराना थाना प्रभारी के द्वारा उपयोग में लिए गए, ऐसा सामने आया है. इस पर एक्शन लेते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर ने जांच के बाद खजराना थाना प्रभारी दिनेश वर्मा को आगामी 3 वर्षों के लिए सब इंस्पेक्टर के पद डिमोट कर दिया. थाना प्रभारी से सब इंस्पेक्टर बनाए गए दिनेश वर्मा को लेकर जांच चल रही है और इंदौर पुलिस कमिश्नर उनपर और बड़ी कार्रवाई कर सकते हैं. इस मामले को लेकर एडिशनल पुलिस कमिश्नर मयंक अवस्थी ने कहा, खजराना थाना प्रभारी दिनेश वर्मा के खिलाफ गंभीर शिकायतें विभाग को मिली थी. जांच कराई गई तो पता चला कि उनके द्वारा कई प्रकरणों में गंभीर लापरवाही बरती है. ऐसे में उनके खिलाफ एक्शन लिया गया है और थाना प्रभारी के पद से हटाकर सब इंस्पेक्टर पद दिया गया है. शासन की गाइडलाइंस व पुलिस विभाग के नियमों के तहत उन पर कार्रवाई की गई है.
