जबलपुर मेडिकल कॉलेज के महामारी विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र विश्नोई और डॉक्टर्स की 5 सदस्यीय टीम के अनुसार बच्चों में पोषण की कमी व दूषित पानी बीमारी की मुख्य वजह हैं। पोषण न मिलने से बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर हो गई, जिससे वे आसानी से संक्रमण की चपेट में आ गए। शुरुआत में बच्चों के शरीर पर दाने, बुखार, मुंह में छाले, भूख न लगना और झटके आने जैसे लक्षण दिखे। बीमारी की सटीक पुष्टि के लिए सैंपल पुणे की लैब में भेजे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में शिविर और अस्थायी अस्पताल बनाकर ग्रामीणों व बच्चों का इलाज शुरू किया है। वर्तमान में 47 बच्चे बैहर और बालाघाट जिला अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 51 बच्चों को स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. परेश उपलप ने 6 बच्चों की मौत की पुष्टि करते हुए विस्तृत रिपोर्ट भोपाल भेज दी है। गौरतलब है कि बीते 23 दिनों में दूसरी बार जबलपुर मेडिकल कॉलेज की टीम जांच के लिए बालाघाट आई है।