जबलपुर। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के बैनर तले जबलपुर में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58, 60, 62 और 65 वर्ष होने पर गंभीर आपत्ति जताई गई है। संघ के प्रमुख पदाधिकारियों अटल उपाध्याय, देवेंद्र पचौरी, आलोक अग्निहोत्री, विवेक रंजन शुक्ला, जय प्रकाश गुप्ता, नरेश शुक्ला, योगेन्द्र मिश्रा, इंद्रप्रताप यादव, मुकेश मिश्रा, रजनीश पांडेय, विनय नामदेव, सतीश उपाध्याय, रवि बांगड़, बीरेंद्र चंदेल, राजू मस्के, बिपिन शर्मा, अर्जुन सोमवंशी, सुशील गुप्ता, राजाराम डेहरिया और प्रियांशु शुक्ला ने इसे स्पष्ट रूप से कर्मचारियों के साथ किया जा रहा बड़ा भेदभाव करार दिया है। संघ का कहना है कि जब सभी कर्मचारियों की नियुक्ति नियम के तहत होती है और एक समान लाभ मिलते हैं, तो रिटायरमेंट की उम्र अलग क्यों रखी गई है।
अलग रिटायरमेंट आयु से कर्मचारियों में असंतोष
राज्य के अलग-अलग विभागों में कार्यरत शासकीय सेवकों को अलग-अलग सेवा निवृत्ति आयु के आधार पर कार्यमुक्त किया जा रहा है। प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत कुछ विभागों में कर्मचारियों को 65 वर्ष की आयु में रिटायर किया जाता है, वहीं कई विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की यह आयु सीमा 62, 60 या फिर 58 वर्ष निर्धारित की गई है। कर्मचारियों का चयन पूरी तरह नियमानुसार और एक समान प्रक्रिया के तहत किया जाता है। सेवाकाल के दौरान सभी को वेतनमान, महंगाई भत्ता, आवास भत्ता, शहरी भत्ता और अन्य वित्तीय लाभ एक समान रूप से प्रदान किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त सेवा निवृत्ति के समय देय पेंशन, उपादान, अवकाश नगदीकरण और कर्मचारी की असामयिक मृत्यु पर दी जाने वाली अनुकंपा नियुक्ति के नियम भी संपूर्ण राज्य में एक समान हैं। ऐसे में केवल सेवानिवृत्ति की आयु में अंतर होना समझ से परे है और यह सीधे तौर पर प्रशासनिक समानता के सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होता है।
सभी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 65 वर्ष हो
कर्मचारी संगठनों का स्पष्ट मत है कि यदि सभी विभागों में सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर एक समान 65 वर्ष कर दी जाए, तो इससे शासन को कई प्रकार के वित्तीय और प्रशासनिक लाभ मिल सकते हैं। एक समान आयु होने से सरकार को एकमुश्त में पेंशन, उपादान, अवकाश नगदीकरण और जीपीएफ फंड का भारी भरकम भुगतान करने के लिए 3 वर्ष का अतिरिक्त समय मिल जाएगा, जिससे खजाने पर एक साथ अत्यधिक दबाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों तथा कर्मचारियों के लंबे कार्यकाल का सीधा लाभ राज्य की विकास योजनाओं को मिलेगा। शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक तेजी से होगा और जनता तक समय पर सुविधाएं पहुंच सकेंगी। इस 3 वर्ष की अतिरिक्त अवधि के दौरान सरकार को रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का पर्याप्त अवसर भी मिल जाएगा।
