जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने राज्य सरकार के वर्ष 2025 वाले पदोन्नति में आरक्षण नियमों की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अगली सुनवाई 26 अगस्त 2026 तय की है। भोपाल की पशु चिकित्सक डॉ. स्वाति तिवारी एवं अन्य की याचिकाओं पर हुई सुनवाई में अदालत ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित आरबी राय प्रकरण में दायर अर्जेंट हियरिंग अर्जियों पर शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देश आने के बाद ही आगे की कार्यवाही होगी। मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील नरेश कौशिक, मनोज शर्मा, अमोल श्रीवास्तव व लावण्या वर्मा, सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, जान्हवी पंडित तथा हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक शाह पेश हुए।
शीर्ष अदालत के फैसले से तय होगी दिशा
राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों के करियर से जुड़ा यह कानूनी विषय बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक देश की सबसे बड़ी अदालत इस संदर्भ में कोई अंतिम व्यवस्था या मार्गदर्शन नहीं देती, तब तक प्रांतीय स्तर पर नियमों की संवैधानिकता तय करना संभव नहीं होगा। दोनों पक्षों की अर्जियों पर दिल्ली में होने वाला मंथन इस गतिरोध को सुलझाने में निर्णायक साबित होगा।
प्रांतीय सेवा संवर्ग में नया प्रशासनिक गतिरोध गहराया
प्रशासनिक तंत्र में पदोन्नति की प्रक्रिया लंबे समय से अटकी होने के कारण शासकीय कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो रही है। नए दिशा-निर्देशों के अभाव में विभागीय पदोन्नति समितियां अपनी कार्यसूची आगे नहीं बढ़ा पा रही हैं। ऐसे में आगामी तिथि तक सभी पक्षों की निगाहें नई दिल्ली से आने वाले कानूनी संदेश पर टिकी रहेंगी।
