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बारिश पर भारी पड़ा नर्मदा भक्तों का अटूट हौसला,देखें वीडियो


जबलपुर। राष्ट्रीय शिक्षित युवा संघ के बैनर तले ग्वारीघाट से नगर निगम कार्यालय तक नर्मदा बचाओ पदयात्रा 1.0 निकाली गई। मूसलाधार बारिश में युवाओं और नर्मदा भक्तों ने ग्वारीघाट से पैदल मार्च करते हुए नगर निगम पहुंचकर डेढ़ से दो घंटे तक शांतिपूर्ण धरना दिया। इसके बाद जल प्रदूषण रोकने, सीवेज प्रबंधन और घाटों के संरक्षण की मांगों का ज्ञापन सौंपा। जिला अध्यक्ष नीरज शर्मा ने नर्मदा को आस्था और जीवन का आधार बताते हुए प्रशासन से सकारात्मक सहयोग की बात कही। प्रदर्शन में अविनाश गोस्वामी, आदित्य साहू, आयुष राजपूत, सुमित शर्मा, यशराज मौर्य, रचित नामदेव, कपिल लोधी, करण तिवारी, वेदांश, अनुराग केवट, अर्जुन ठाकुर, लकी चौधरी, अंशुल और हिमांशु तथा पुष्कर सहित कई लोग मौजूद रहे।

​जबलपुर में युवाओं ने संभाली माँ नर्मदा संरक्षण की कमान

​ग्वारीघाट से शुरू हुई पदयात्रा में शामिल युवाओं ने शहर की जीवनदायिनी नर्मदा नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए जोरदार हुंकार भरी। भारी बारिश के बाद भी कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं हुआ और वे लगातार नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ते रहे। ग्वारीघाट से नगर निगम तक के पूरे रास्ते में लोगों ने इस मुहिम का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि नदी में मिल रहा गंदा पानी और सीवेज इसकी पवित्रता को नष्ट कर रहा है। घाटों की बदहाली से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। युवाओं ने स्पष्ट किया कि जल की गुणवत्ता की नियमित जांच होनी चाहिए ताकि लोगों को स्वच्छ जल मिल सके। इस यात्रा का मुख्य मकसद आम जनता को पर्यावरण और जल स्रोतों की रक्षा के प्रति जागरूक करना रहा।

​मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

​नगर निगम परिसर में चले लंबे धरने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यदि समय सीमा के भीतर दूषित पानी को रोकने और व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह सिर्फ पहला चरण था और प्रशासन की निष्क्रियता की स्थिति में नर्मदा बचाओ पदयात्रा 2.0 की शुरुआत की जाएगी। दूसरे चरण में पूरे शहर से अधिक से अधिक लोगों को जोड़कर व्यापक स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। लोकतंत्र के दायरे में रहकर अधिकारों की लड़ाई लड़ने और नदी के प्राकृतिक स्वरूप को वापस लौटाने तक यह प्रयास लगातार जारी रहेगा।

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