जबलपुर। कैंट थाना क्षेत्र में चरित्र पर लांछन और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर 35 वर्षीय शमा परवीन ने 17 जून को आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाया। नेशनल अस्पताल में इलाज के दौरान शमा की दुखद मृत्यु हो गई। इस मामले में मृतिका के पति जावेद घोसी की रिपोर्ट पर पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें पड़ोस में रहने वाली चाची सास नज़मा, चचेरी ननद अरीना और चचेरे देवर सद्दाम घोसी की गंभीर भूमिका सामने आई। आरोपियों ने शमा के चरित्र पर गलत आरोप लगाकर उसे लगातार अपमानित किया और आत्महत्या के लिए उकसाया। सद्दाम घोसी ने तो उसे मर जाने तक के लिए कह दिया था, जिससे आहत होकर शमा ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 और 3(5) के तहत केस दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
चरित्र पर सवाल उठाए और अभद्र टिप्पणी की
घटनाक्रम की शुरुआत 17 जून को दोपहर 12 बजे हुई जब शमा परवीन घर के बाहर ईंटें हटा रही थी। नज़मा और उसकी बेटी अरीना ने उसे रोककर अभद्र भाषा का प्रयोग किया और चरित्र पर सवाल उठाए। शमा ने अपने पति जावेद को फोन कर पूरी पीड़ा बताई थी, जो उस समय जीसीएफ फैक्ट्री में ड्यूटी पर थे। बाद में पता चला कि शमा ने जहर खा लिया है। इस पूरे घटनाक्रम में चचेरे देवर सद्दाम घोसी की संवेदनहीनता ने आग में घी का काम किया। फोन पर अपनी व्यथा बताने वाली शमा को सांत्वना देने के बजाय सद्दाम ने उसे मर जाने के लिए कहा। पुलिस द्वारा की गई विस्तृत विवेचना में इन तीनों आरोपियों की प्रताड़ना के ठोस साक्ष्य मिले हैं। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और आगे की कानूनी कार्यवाही जारी है। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है और मानवीय संवेदनाओं पर गहरे सवाल खड़े किए हैं।
