जबलपुर। शहर के गोरखपुर इलाके में गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाली महिलाओं सोना शर्मा, गीता विश्वकर्मा, मेधा बर्मन, प्रभा पटेल, क्रांति सेन और महक पटेल के साथ राशन कार्ड के नाम पर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। गोरखपुर तहसील कार्यालय की एक महिला कर्मचारी ने कार्ड बनवाने के एवज में प्रत्येक महिला से 10000 रुपये वसूले और सभी को नकली बीपीएल कार्ड थमा दिए। जब महिलाएं बच्चों के स्कूल एडमिशन और राशन के लिए निगम व तहसील पहुंचीं तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इस ठगी से करीब 25 महिलाओं को चूना लगा है और उन्होंने लिखित शिकायत दर्ज कराई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की गई है। पिछले साल भी ऐसे ही एक मामले में गिरफ्तारी होने की बात सामने आई है।
तहसील के भीतर कागजी फर्जीवाड़े का सच ऐसे आया सामने
जबलपुर के गोरखपुर इलाके में महिलाओं के साथ हुआ यह फ्रॉड तब उजागर हुआ जब वे अपने बच्चों का स्कूल में एडमिशन कराने के लिए गरीबी रेखा का कार्ड लेकर पहुंचीं। स्कूल प्रबंधन ने कार्ड पर नगर निगम की सील और हस्ताक्षर कराने के लिए कहा। जब महिलाएं नगर निगम पहुंचीं तो वहां के कर्मचारियों ने उन्हें तहसील कार्यालय जाने की सलाह दी। तहसील पहुंचने पर वहां बैठे एक कर्मचारी ने कार्ड को फर्जी बताते हुए महिलाओं को चुपचाप घर लौटने की धमकी दी और ऐसा न करने पर एफआईआर दर्ज कराने की बात कही। इस धमकी के बाद डरी सहमी महिलाओं ने तुरंत गोरखपुर थाने का रुख किया और पुलिस अधिकारियों को पूरी आपबीती सुनाई, जिससे इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश हो गया।
गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर चला रहे थे रैकेट
पीड़ित महिलाओं ने थाने में दी गई अपनी शिकायत में बताया कि वे सभी मेहनत-मज़दूरी करके अपने परिवार का पेट पालती हैं और उनके पति भी प्राइवेट काम करते हैं। राशन कार्ड के लिए कई बार ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन करने के बावजूद उनके आवेदन बार-बार खारिज कर दिए जाते थे। पटवारी ने कभी उनके घर आकर उनकी गरीबी की वास्तविक स्थिति की जांच तक नहीं की। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर गोरखपुर तहसील कार्यालय की एक महिला कर्मचारी ने उनसे संपर्क किया और 10000 रुपये लेकर फर्जी कार्ड तैयार करवा दिए। महिलाओं ने अपने आधार कार्ड, फोटो और अन्य ज़रूरी दस्तावेज़ भी सौंपे थे। तहसील परिसर में बैठे आउटसोर्स कर्मचारी खुलेआम गरीबों को लूट रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं। इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आ गई है और गोरखपुर थाने के एसआई रवींद्र तिवारी इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं। पुलिस के पास अब तक लगभग 25 महिलाओं की आधिकारिक शिकायतें पहुँच चुकी हैं, जिनसे यह साबित होता है कि एक संगठित गिरोह गरीबों के नाम पर अवैध वसूली कर रहा था। जांच अधिकारी रवींद्र तिवारी का कहना है कि यह पूरा रैकेट बड़े स्तर पर फैला हुआ है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाया जा रहा है। पिछले साल भी इसी तहसील से जुड़ा फर्जी राशन कार्ड का एक अन्य मामला सामने आया था जिसमें एक आरोपी की गिरफ्तारी भी हुई थी। पुलिस अब तहसील के दस्तावेजों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है ताकि सभी दोषियों को जल्द से जल्द बेनकाब किया जा सके।
