जबलपुर। सरकारी महकमों में नियमों के गलत तरीके से पालन होने और प्रशासनिक भूल के कारण हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब पदावनति का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। स्थिति यह बन चुकी है कि सामान्य प्रशासन विभाग की इस बड़ी चूक की वजह से कई लोग परेशान हो रहे हैं। जानकार लोगों का कहना है कि नियमों को लागू करने के दौरान उचित सावधानी नहीं बरती गई, जिसका खामियाजा अब जमीनी स्तर पर काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। जबलपुर से सामने आई इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक खबर के अनुसार, वर्ष 2025 के नियमों के तहत प्रक्रिया देरी से शुरू होने के कारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पदोन्नति प्रक्रिया में आई इस भारी तकनीकी खामी के कारण कई ऐसे हालात बन गए हैं जो प्रशासनिक कामकाज पर सीधा असर डाल रहे हैं। स्थिति यह है कि सेवानिवृत्त अधिकारियों को तो इसका फायदा मिल सकता है, लेकिन जो अधिकारी वर्षों से केवल प्रभारी के रूप में काम संभाल रहे थे और अपनी पदोन्नति का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, वे पूरी तरह से वंचित रह जाएंगे। इसके अलावा, वर्ष 2025 की स्थिति के आधार पर ही सारी पदोन्नति की जा रही है और अगली डीपीसी वर्ष 2027 में होने की बात सामने आ रही है। एक वर्ष में दो डीपीसी करने का कोई भी प्रावधान न होने की वजह से वर्ष 2026 की डीपीसी पूरी तरह से अटक गई है, जिससे कर्मचारियों में भारी निराशा और चिंता का माहौल बना हुआ है।
प्रमोशन नियम 2025 में बदलाव की दरकार
नियमों की इस पेचीदगी से राहत पाने के लिए जानकारों और विशेषज्ञों ने सामान्य प्रशासन विभाग को स्पष्ट सलाह दी है कि उन्हें किसी भी प्रकार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले पदोन्नति नियम 2025 में आवश्यक संशोधन करना बेहद जरूरी था। जानकारों का साफ तौर पर सुझाव है कि विशेष डीपीसी के अंतर्गत पूर्व की सभी रिक्तियों को शामिल करते हुए 31 दिसंबर 2026 तक की रिक्तियों पर विचार किया जाना चाहिए था। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हजारों प्रभारी अधिकारियों का मनोबल गिरना पूरी तरह तय है और प्रशासनिक अमले में असंतोष की भावना और अधिक तेजी से फैल सकती है।
