शिलान्यास कार्यक्रम में मंत्री प्रहलाद पटेल, लोकमत समाचार के प्रबंध संचालक राजेंद्र दर्डा, विधायक अशोक रोहाणी, अशोक जैन, अंशुमान शुक्ल और जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में दर्डा परिवार की इस पहल की सराहना की। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जवाहरलाल दर्डा के पुत्र राजेंद्र दर्डा ने बताया कि उनके पिता का जबलपुर से गहरा नाता रहा है। वे 17 साल की उम्र में महात्मा गांधी से प्रेरित होकर देश की आजादी की लड़ाई में शामिल हुए थे। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 10 अगस्त को 20 वर्ष की आयु में उन्हें गिरफ्तार कर जबलपुर जेल लाया गया था, जहां उन्होंने 19 महीने की सजा काटी थी। राजेंद्र दर्डा 65 साल बाद जबलपुर आए थे और उन्होंने जेल परिसर में बने म्यूजियम की भी प्रशंसा की।
मंत्री बोले, सुधार और स्वीकार का स्थान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रहलाद पटेल ने जबलपुर और विदर्भ के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देश में तिरंगा फहराने का अभियान जबलपुर से शुरू हुआ था, जिसके बाद यह नागपुर में लहराया गया। पटेल ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जबलपुर से जुड़े संस्मरणों को भी याद किया। प्रहलाद पटेल ने कहा कि जेल कोई तिरस्कृत जगह नहीं, बल्कि सुधार और स्वीकार करने वाली जगह है। उन्होंने दर्डा परिवार द्वारा अपने निजी धन से भव्य सभा भवन का निर्माण कराने को एक स्वागत योग्य कदम बताया।
स्वतंत्रता सेनानियों की तपस्थली रहा है जेल-
जबलपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक अखिलेश तोमर ने कहा कि यह जेल स्वतंत्रता सेनानियों की पावन तपस्थली रही है। वर्तमान में जेल परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए केवल एक छोटा हॉल उपलब्ध था, जो बड़ा आयोजन करने में छोटा पड़ता था। इस नए और आधुनिक सभा भवन के बन जाने से जेल में सजा काट रहे कैदियों को मुख्यधारा से जुडऩे, अपनी प्रतिभा निखारने और विभिन्न रचनात्मक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा