जबलपुर। जबलपुर सहित पूरे मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील डाटा पूरी तरह असुरक्षित हो गया है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी विभागों को पदोन्नति संबंधी जानकारी एक ऑनलाइन स्प्रेडशीट में दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इसका उद्देश्य मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए राज्यव्यापी पदोन्नति डाटा तैयार करना था। लेकिन अब यह बड़ा खुलासा हुआ है कि जिस लिंक पर यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की जा रही है, उसकी सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। इस खामी के कारण अब कोई भी अनजान व्यक्ति उस लिंक तक पहुंचकर किसी भी विभाग की गोपनीय जानकारी में हेरफेर कर सकता है या उसे पूरी तरह हटा सकता है, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
प्रशासनिक लापरवाही का खुला खेल जारी
इस गंभीर तकनीकी चूक का पर्दाफाश तब हुआ जब जांच के दौरान विशेषज्ञों ने उस स्प्रेडशीट का परीक्षण किया। पता चला कि इस स्प्रेडशीट में कोई भी व्यक्ति बिना किसी अधिकृत लॉगिन या पासवर्ड के प्रवेश कर सकता है। परीक्षण के दौरान महज एक सेल में किया गया बदलाव तुरंत प्रभाव से सेव हो गया, जो यह साबित करता है कि डाटा के साथ छेड़छाड़ करना कितना आसान है। यदि कोई शरारती तत्व इस कमजोरी का फायदा उठाए, तो पूरे प्रदेश के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन रिकॉर्ड को मनमाने ढंग से बदला जा सकता है। संबंधित विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगेगी और डाटा पूरी तरह गलत हो सकता है।
डाटा की सुरक्षा पर मंडराया बड़ा खतरा
इस मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि हाई कोर्ट में लंबित पदोन्नति के कई महत्वपूर्ण मामलों से जुड़ी जानकारियां भी इस लिंक में शामिल हैं। यदि इन आंकड़ों में कोई बदलाव किया जाता है, तो इसके कानूनी और प्रशासनिक परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। करोड़ों रुपये के प्रशासनिक निर्णयों का आधार बनने वाले इस डाटा को जिस तरह से सार्वजनिक रखा गया है, वह शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। सुरक्षा के मानकों को ताक पर रखकर तैयार की गई यह डिजिटल व्यवस्था अब सरकारी कामकाज के लिए ही बड़ा खतरा बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस लिंक को सुरक्षित नहीं किया गया तो राज्य का पूरा प्रमोशन रिकॉर्ड संदिग्ध हो सकता है।
