कोर्ट ने यह फैसला जमीनों की रजिस्ट्री के दौरान उनकी वास्तविक स्थिति छिपाकर राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामले में सुनाया है। इसके तहत पेनल्टी और 1 प्रतिशत मासिक ब्याज के साथ वसूली की जाएगी। कलेक्टर ऑफ स्टाम्प के पीठासीन अधिकारी पंकज कोरी ने 29 जून 2026 को यह आदेश पारित किया। जांच में सामने आया कि एनएच-7 (मिजऱ्ापुर रोड) और मुख्य मार्गों से लगी करोड़ों रुपए की जमीनों को दस्तावेजों में अंदरूनी क्षेत्र का दर्शाया गया था। इस हेराफेरी के जरिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया। इस गड़बड़ी का खुलासा कटनी के एमआईजी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी नाजिम खान की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 48-ख के तहत न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, क्रेता कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता हर्ष कपूर ने भू-स्वामियों के साथ मिलकर वर्ष 2018 और 2019 की रजिस्ट्री दस्तावेजों में जानबूझकर हेराफेरी की थी। न्यायालय ने मौजा झिंझरी स्थित खसरा नंबर 292 के 5 मामलों की सुनवाई की, जिनमें से 4 में बड़ी गड़बड़ी मिली। सुनील कुमार सहजवानी और जसवंत कुमार मोहनानी की जमीनों को बेचते समय एनएच-7 की स्थिति छुपाई गई। नानकराम भोजवानी के मामले में मुख्य मार्ग के साथ-साथ मौके पर मौजूद 3500 वर्ग फीट के टिनशेड की जानकारी भी छिपाई गई थी। अनिल टहलरमानी की जमीन को भी अंदर दर्शाकर टैक्स चोरी की गई।
नोटिस लेने से किया था इनकार-
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने क्रेता पक्ष के हर्ष कपूर को स्पीड पोस्ट से नोटिस भेजे थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर इन्हें लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद अदालत ने मामले में एकपक्षीय कार्यवाही शुरू की। संयुक्त उप पंजीयक द्वारा किए गए गोपनीय निरीक्षण में शिकायतकर्ता के सभी आरोप सही पाए गए।
वर्ष 2018 से लगेगा 1 प्रतिशत मासिक ब्याज-
अदालत ने आदेश दिया है कि केवल मूल राशि की वसूली नहीं होगी। जमीन दस्तावेज निष्पादन की तारीख (वर्ष 2018) से पूरी बकाया राशि पर 1 प्रतिशत प्रति माह की दर से पेनल्टी और 1 प्रतिशत मासिक ब्याज भी देना होगा। एक अन्य विक्रेता विजय कुमार टहलरमानी का मामला सही पाया गया, जिस पर कोई कर नहीं लगाया गया है।