नई दिल्ली. केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन व पेंशन संशोधनों से जुड़े 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का कार्यकाल अपने 18 महीने की अवधि के लगभग आधे पड़ाव पर पहुंच चुका है. आयोग लगातार विभिन्न राज्यों में जाकर कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी निकायों और अन्य हितधारकों के साथ बैठकों का दौर चला रहा है. इन तमाम चर्चाओं के बीच सबसे अहम मुद्दा 'फिटमेंट फैक्टर बना हुआ है. इसी आंकड़े से यह तय होगा कि कर्मचारियों के मूल वेतन और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी की जाएगी.
ओडिशा और पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय बैठकें संपन्न
आयोग अपनी परामर्श प्रक्रिया को देशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ा रहा है. हाल ही में 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर (ओडिशा) और 9-10 जुलाई को कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में हितधारकों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं. इन बैठकों में कर्मचारी संगठनों, विभिन्न विभागों के संघों और पेंशनभोगियों ने फिटमेंट फैक्टर, भत्तों, पदोन्नति नियमों और सेवा शर्तों को लेकर अपनी मांगें और ज्ञापन आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए.
फिटमेंट फैक्टर को लेकर क्या हैं उम्मीदें?
कर्मचारी यूनियनों और नेशनल काउंसिल-जेसीएम (एनसी-जेसीएम) की ओर से 3 गुना से अधिक (लगभग 2.86& से 3.68& तक) फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की जा रही है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने अभी तक फिटमेंट फैक्टर के संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा प्रस्तावित नहीं किया है.
आयोग के गठन से लेकर अब तक का सफर
16 जनवरी 2025: सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की.
28 अक्टूबर 2025: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नियम व शर्तों को मंजूरी दी.
3 नवंबर 2025: आयोग का औपचारिक गठन किया गया.
फरवरी-अप्रैल 2026: आधिकारिक पोर्टल और ज्ञापनों के माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए गए.
15 जून 2026: ज्ञापन जमा करने की अंतिम तिथि समाप्त हुई.
कब तक आएगी अंतिम रिपोर्ट?
आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जिसके अनुसार रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की संभावना है. रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मंत्रियों का समूह और केंद्रीय मंत्रिमंडल देश की आर्थिक स्थिति व वित्तीय व्यवस्था को ध्यान में रखकर नए वेतन ढांचे और फिटमेंट फैक्टर पर अंतिम निर्णय लेगा.
