जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर राजभवन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। राज्यपाल सचिवालय ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराने के निर्देश मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग को दिए हैं। इसके साथ ही राजभवन ने कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करते हुए धारा 52 लागू किए जाने के संबंध में नियमानुसार आवश्यक कदम उठाने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। इस पूरी उच्च स्तरीय कार्रवाई से विश्वविद्यालय के गलियारों में खलबली मच गई है।
राजभवन के निर्देश से विश्वविद्यालय के गलियारों में मचा हड़कंप
यह पहला ऐसा मौका सामने आया है जब राजभवन ने सीधे तौर पर धारा 52 लगाने के लिए राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग को इस तरह के सख्त निर्देश दिए हैं। राज्यपाल के उप सचिव कार्यालय से जारी आधिकारिक पत्र क्रमांक 574/रास/्यू.ए.-2/2026 के माध्यम से मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया है।
20 जून की उस शिकायत का पूरा सच जिसने हिला दी पूरी व्यवस्था
बताया जाता है कि 20 जून को राजभवन को एक विस्तृत शिकायत पत्र प्राप्त हुआ था। पत्र में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियों व अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच समिति गठित करने की मांग की गई थी। इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन एवं पारदर्शी व्यवस्था हेतु विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 52 लागू करने और वर्तमान कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करने का पुरजोर अनुरोध किया था। राजभवन द्वारा उक्त शिकायत के मूल पत्र को संलग्न कर उच्च शिक्षा विभाग को नियमानुसार कार्रवाई हेतु अग्रसारित किए जाने के बाद से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अब सभी की निगाहें उच्च शिक्षा विभाग के अगले कदम और संभावित जांच कमेटी के गठन पर टिकी हुई हैं।
