चर्चाओं के दौरान यह बात सामने आई है कि लोहे की यह मोटर बोट करीब 1986 में पानी में डूब गई तो इसके बाद पानी के अंदर ही दबी रही, इसके बाद ऐसा मौका आया है कि बरगी बांध का जलस्तर बिलकुल नीचे आ गया, जिसके चलते यह लोहे की बोट दोबारा दिखने लगी। करीब 20 साल पहले यह नाव को लोगों ने पानी के अंदर देखा था। चर्चाओं यह बात भी सामने आई है कि यह नाव बरगी बांध निर्माण के दौरान पुनर्वास विभाग के काम में लगाई जाती थी। बांध बनने के समय विस्थापित परिवारों के आवागमन और राहत कार्य के लिए ऐसी कई मोटर बोट चलाई जाती थीं। इन्हीं में से एक नाव हादसे का शिकार होकर डूब गई थी। उस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। करीब 55 फीट गहराई में दबी रही इस लोहे की मोटर बोट पर आज भी सुमा रैप्स प्रोजेक्ट जबलपुर लिखा हुआ दिखाई देता है। सालों तक पानी में रहने के कारण पूरी नाव में जंग लग चुकी है और अब यह कबाड़ जैसी हालत में है।
बरगी बांध पहले कभी इतना नहीं सूखा-
शहर में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि बरगी बांध पहले इतना नहीं सूखा है, अब लोग इस नाव को ऐतिहासिक धरोहर मान रहे है, नाव का केबिन भी दिखाई दे रहा है, जहां पर लोग बैठा करते रहे। अब इस नाव को देखने के लिए शहर के लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे है। यह 40 साल पुरानी मोटर बोट लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।