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ई-20 पेट्रोल ने बिगाड़ा वाहनों का गणित, किया विरोध



जबलपुर। जबलपुर में एथेनाल मिश्रित ई-20 पेट्रोल ने वाहन चालकों की जेब पर बड़ा असर डाला है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने खुलासा किया कि ई-20 के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज 6 प्रतिशत तक कम हो गया है। इस वजह से दोपहिया और चार पहिया वाहन मालिकों को अधिक पेट्रोल डलवाना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। इस समस्या के विरोध में आज शहर के घंटाघर के पास एक प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा है। मांग की गई है कि ई-20 पेट्रोल की कीमत कम की जाए या फिर उपभोक्ताओं को बिना एथेनाल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए ताकि वे महंगाई की इस दोहरी मार से बच सकें।

​वाहनों के माइलेज में आई भारी गिरावट

​मंच ने बताया कि ई-20 पेट्रोल के उपयोग से जबलपुर में दोपहिया वाहनों का माइलेज 40 किलोमीटर से घटकर 30 किलोमीटर और कारों का माइलेज 15 किलोमीटर से गिरकर 12 से 13 किलोमीटर रह गया है। इस माइलेज कमी के कारण 50 से 75 किलोमीटर तक वाहन चलाने के लिए दोपहिया वाहनों में 1 लीटर और कारों में 2 लीटर तक अतिरिक्त पेट्रोल लग रहा है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है और उन्हें हर बार पेट्रोल भराते समय 100 से 200 रुपये तक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। तकनीकी कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि एथेनाल में ऑक्सीजन होने के कारण यह पेट्रोल की तुलना में अधिक नमी सोखता है, जिससे वाहन खराब होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

​सरकार से उचित विकल्प की मांग उठी

​घंटाघर के पास हुए इस प्रदर्शन में टी.के. रायघटक, डी.के. सिंह, सुभाष चंद्रा, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, घनश्याम सोनकर, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, पी.एस. राजपूत, मनीष शर्मा, संतोष श्रीवास्तव, अर्जुन परीड़ा, उमा दाहिया, मनीषा साहू, एड. ब्रजेश कुमार साहू, डी.आर. लखेरा, अशोक यादव, प्रफुल्ल सक्सेना, विनायक सोरते, कैलाश पटेल, यशवंत कोष्टा, अंकित गोस्वामी, मनोज सैनी, श्याम सोलंकी, निर्भय कोष्टा और राजेश गिदरोनिया सहित बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में सरकार से मांग की है कि एथेनाल मिश्रित पेट्रोल के दुष्प्रभावों को देखते हुए जल्द ठोस कदम उठाए जाएं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार ने विकल्प उपलब्ध नहीं कराया, तो आम उपभोक्ताओं का आर्थिक नुकसान और बढ़ता जाएगा, जिसे सहन करना बेहद कठिन है।

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