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एक लापरवाही से जबलपुर सहित 16 जिलों के डीए एरियर में फंसा पेंच



जबलपुर। मध्य प्रदेश में जून 2026 के वेतन और महंगाई भत्ता यानी डीए एरियर के वितरण में जबलपुर सहित 16 जिलों के कॉलेजों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मांगी गई आवश्यक जानकारी समय पर नहीं भेजने के कारण इन कॉलेजों को राशि आवंटन की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, इंदौर, नेपानगर, मंदसौर, उज्जैन, भिंड, मुरैना, अशोकनगर, हरदा, होशंगाबाद, विदिशा, रीवा और सागर के अधिकारियों की इस लापरवाही का सीधा असर शिक्षकों और कर्मचारियों पर पड़ा है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि 8 जून तक निर्धारित प्रारूप में जानकारी उपलब्ध कराई जाए, लेकिन बार-बार रिमांडर भेजने के बाद भी विवरण प्राप्त नहीं हुआ। अब इन जिलों के कॉलेजों के स्टाफ को अपने वेतन और एरियर के लिए कुछ और दिनों का लंबा इंतजार करना होगा।

​समय पर जानकारी न देने से बढ़ा संकट

​उच्च शिक्षा विभाग ने अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के लिए 24.92 लाख रुपए से अधिक की राशि का आवंटन जारी किया था। यह राशि उन कॉलेजों के लिए थी जिन्होंने समय सीमा के भीतर अपनी जानकारी विभाग को सौंप दी थी। विभाग की ओर से 2 जून को ही सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए थे कि वे अपने क्षेत्र के कॉलेजों का विवरण समय रहते जमा करें। जिन 16 जिलों ने इस मामले में सुस्ती दिखाई, वहां के शिक्षकों के खातों में समय पर वेतन नहीं पहुंच सका है। जबलपुर के अधिकारियों का कहना है कि अनुदादित महाविद्यालयों से विभाग द्वारा निर्देशानुसार जानकारी मांगी जाती है। कुछ कॉलेजों की देरी की वजह से ऐसी स्थिति निर्मित होती है, हालांकि अब इन कॉलेजों से जानकारी लेकर शीघ्र प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

​विभागीय सख्ती के बाद अब बढ़ी बेचैनी

​विभाग की इस सख्ती के बाद अब संबंधित जिलों के शिक्षा अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है। जब तक इन जिलों से एकीकृत मांग और सही प्रारूप में डेटा प्राप्त नहीं होगा, तब तक राशि का वितरण संभव नहीं हो पाएगा। विभाग ने साफ कर दिया है कि वे नियमों के दायरे में रहकर ही वित्तीय आवंटन करेंगे। इस देरी ने कॉलेज स्टाफ की आर्थिक परेशानी बढ़ा दी है, क्योंकि वे हर महीने समय पर वेतन मिलने की उम्मीद रखते हैं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अब पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही को रोका जा सके और कॉलेजों को समय पर राशि मिल सके।

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