पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डकैती के मुख्य आरोपी सुनील पासवान ने डकैती के रुपयों को बिहार में कई जगह निवेश किया। रिश्तेदारों के नाम पर ट्रक व लग्जरी गाडिय़ां खरीदी थी। अधिकारियों ने बताया कि बिहार के सुनील पासवान की मुलाकात एमपी के राजेश दास से हुई थी। दोनों ने सिहोरा की तीन बैंकों की रेकी की। इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक में सुरक्षा गार्ड नहीं होने के कारण उसे निशाना बनाया गया। गैंग ने करीब 10 दिन तक रेकी की। मझौली में फेरीवाले के नाम पर किराए का मकान लिया और जबलपुर से मोटरसाइकिल खरीदकर वारदात को अंजाम दिया। गौरतलब है कि 11 अगस्त 2025 को जबलपुर जिले के सिहोरा स्थित इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक में पांच हथियारबंद बदमाशों ने दिनदहाड़े महज 18 मिनट में करीब 14.5 करोड़ रुपए मूल्य का सोना और 5 लाख रुपए नकदी की लूट की थी। यह जबलपुर की सबसे बड़ी बैंक डकैतियों में से एक थी। वारदात के बाद पुलिस ने 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाले। जांच में गैंग के ज्यादातर सदस्य गिरफ्तार हो गए, लेकिन मास्टरमाइंड सुनील पासवान 11 महीने तक फरार रहा। उस पर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड पुलिस ने कुल 1 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।
छत के रास्ते भागने की कोशिश की-
जबलपुर क्राइम ब्रांच और बिहार एसटीएफ की संयुक्त टीम ने उसे बिहार के नक्सल प्रभावित बांके बाजार क्षेत्र के एक गांव से उस समय दबोचा, जब वह नग्न हालत में सो रहा था। पुलिस को देखते ही उसने चादर लपेटकर छत के रास्ते भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी के चलते पकड़ा गया।
पत्नी से कराता रहा 5 हजार रुपए की नौकरी-
करोड़ों की डकैती के बावजूद सुनील ने पत्नी ममता पासवान को धनबाद के एक बुटीक में 5 हजार रुपए महीने की नौकरी पर लगवा रखा था। दोनों बेटे भी वहीं रहते थे। केवल संदेह से बचने के लिए की गई थी, जबकि वह परिवार को हर महीने 50 हजार से 1 लाख रुपए भेजता था।
चार से अधिक ट्रक और दो लग्जरी कारें खरीदीं-
पुलिस के अनुसार, डकैती से मिले सोने और रकम को सुनील निवेश करता था। उसने चार से अधिक ट्रक और दो लग्जरी कारें खरीदीं। अपनी फर्म के जरिए कोल माइंस में वाहन चलवाए, जिन्हें रिश्तेदारों के नाम पर रखा गया था। टैक्स और जीएसटी का भुगतान भी वही करता था।