जबलपुर। पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत रेल परिचालन को और आधुनिक एवं सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। पश्चिम मध्य रेल के महाप्रबंधक श्री दिलीप कुमार सिंह के मार्गदर्शन, प्रमुख मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर के निर्देशन में एवं मण्डल रेल प्रबंधक के नेतृत्व में भोपाल यूनिट के उप मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर/परियोजना की टीम द्वारा मंडल के कल्हार–बरेठ–गंजबासौदा रेलखंड पर आधुनिक ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (ABS) प्रणाली का 09 जून 2026 को सफलतापूर्वक शुभारंभ किया गया है।
इस दौरान मुख्यालय से मुख्य संकेत एवं दूर संचार इंजीनियर, भोपाल मंडल से उप मुख्य संकेत एवं संचार इंजीनियर, मंडल संकेत एवं दूर संचार इंजीनियर एवं कार्य संपादित करने वाली एजेंसी के मुख्य कार्य निदेशक एवं अन्य रेल्वे अधिकारी उपस्थित रहे। इस परियोजना के शुरू होने से पश्चिम मध्य रेल में रेल संचालन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और दक्षता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी तथा भविष्य की बढ़ती यातायात आवश्यकताओं के लिए मजबूत आधार तैयार होगा।
लगभग 19.57 किलोमीटर लंबे इस खंड में अत्याधुनिक ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली स्थापित की गई है। इसकी निगरानी स्टेशन मास्टर कक्ष में स्थापित वीडियो डिस्प्ले यूनिट के माध्यम से की जाती है। इस प्रणाली के माध्यम से ब्लॉक सेक्शन में अधिक ट्रेनों का संचालन, तेज और कुशलतापूर्वक किया जा सकेगा।परियोजना के अंतर्गत कल्हार–बरेठ तथा बरेठ–गंजबासौदा खंडों में आधुनिक रिले हटों का निर्माण किया गया है। संचार व्यवस्था को विश्वसनीय बनाने के लिए 24 फाइबर ऑप्टिक केबल की रिंग संरचना तथा 48-कोर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा खंड में 45 ऑटो सिग्नल और 196 डेटा पॉइंट स्थापित किए गए हैं।
रिले हटों में डाटा लॉगर, निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रणाली, स्वचालित अग्नि पहचान एवं अलार्म प्रणाली तथा 25 केवीए क्षमता के ऑटोमैटिक ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं। सभी व्यवस्थाएं आरडीएसओ के निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित की गई हैं।
नई प्रणाली के लागू होने से ट्रेनों के बीच सुरक्षित अंतर बनाए रखने, रेल यातायात की क्षमता बढ़ाने तथा समयपालन में सुधार करने में सहायता मिलेगी। साथ ही आधुनिक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क भविष्य में कवच जैसी उन्नत सुरक्षा प्रणालियों एवं यात्री सूचना प्रणालियों के लिए उच्च गति डेटा संचार उपलब्ध कराएगा। इससे तांबे की केबलों और पारंपरिक रिले आधारित प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी तथा रखरखाव लागत में भी कमी आएगी।

