शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी में ग्रामीणों ने माधव टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों पर उनके मवेशी चुराने और उसे बाघ (टाइगर) का निवाला बनाने के गंभीर आरोप लगाते हुए मंगलवार रात सुरवाया थाने के बाहर गुर्जर समाज के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर धरना दिया। पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद ही ग्रामीण रात करीब 1 बजे धरने से उठे।
ग्रामीणों का आरोप है कि माधव टाइगर रिजर्व के कर्मचारी संग्राम सिंह गुर्जर का लगभग तीन साल का भैंस का बच्चा (पड़ा) एक डीसीएम वाहन में डालकर ले गए हैं। उनका दावा है कि इसे टाइगर के बाड़े में छोड़ा गया है, ताकि वह उसका शिकार कर सके। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के ही एक बुजुर्ग ने वनकर्मियों को मवेशी डीसीएम में डालते हुए देखा था।
ग्रामीणों का संदेह- हिंसक जानवर नहीं, प्रबंधन उठा रहा मवेशी
ग्रामीणों का कहना है कि पहले उन्हें लगता था कि जंगल के हिंसक जानवर ही उनके मवेशियों का शिकार कर रहे हैं, लेकिन इस घटना के बाद उन्हें संदेह है कि पार्क प्रबंधन खुद मवेशियों को उठाकर ले जा रहा है। घटना के बाद ग्रामीणों ने अपने स्तर पर मवेशी की काफी तलाश की, लेकिन जब उसका कोई सुराग नहीं मिला तो आक्रोशित होकर वे सुरवाया थाने पहुंच गए और धरने पर बैठ गए।
चोरी का मामला दर्ज
सुरवाया थाना प्रभारी अरविंद छारी ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मवेशी चोरी कर ले जाने का मामला दर्ज कर लिया है और घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पुलिस की इस कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही ग्रामीण शांत हुए।
रेंजर ने आरोपों को बताया झूठा
दूसरी तरफ, माधव टाइगर रिजर्व के रेंजर आर.के. दीक्षित ने ग्रामीणों के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा, पहले ग्रामीण अपने मवेशियों को पार्क क्षेत्र में चराने के लिए लाते थे, लेकिन इसे टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने के बाद नियम सख्त हो गए हैं और अब बिना अनुमति प्रवेश वर्जित है। मंगलवार को तीन ग्रामीण बलारपुर क्षेत्र में बने टाइगर बाड़े के पास अवैध रूप से घूमते मिले थे, जिन पर वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया है। रेंजर के अनुसार, इसी कार्रवाई से बचने और रिजर्व क्षेत्र में बेरोकटोक आने-जाने का दबाव बनाने के लिए कुछ लोगों ने प्रबंधन पर मवेशी चुराने के झूठे आरोप लगाए हैं।
