जबलपुर। जबलपुर में आयोजित वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस समारोह के मंच के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दबंगों के खौफ से जूझ रही एक बेबस मां और उसकी बेटी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का रास्ता रोक लिया। आंखों में आंसू और दिल में खौफ लिए इन महिलाओं ने सीधे सूबे के मुखिया के सामने पुलिसिया तंत्र की नाकामी का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। इससे पहले अपनी जान की भीख मांगने के लिए यह पीड़ित परिवार 16 जून 2026 को जिला कलेक्टर कार्यालय के गलियारे में घुटनों के बल बैठ गया था। लगातार मिल रही धमकियों और स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने से टूट चुकी महिलाओं की इस चीख को मुख्यमंत्री ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पीड़ितों को न्याय का भरोसा दिलाया।
खाकी की सुस्ती ने बढ़ाया बेलगाम बदमाशों का हौसला
शहर के रिहायशी इलाके में रहने वाली इन दो अकेली महिलाओं का जीवन कुछ रसूखदार गुंडों ने नरक बना दिया है। पीड़ित मां-बेटी का आरोप है कि असामाजिक तत्व उन्हें सरेआम मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने सुरक्षा की गुहार लगाते हुए थाने के चक्कर काटे, लिखित आवेदन दिए, लेकिन खाकी की रहस्यमयी चुप्पी ने अपराधियों के हौसलों को और बुलंद कर दिया। आलम यह है कि दोनों महिलाएं अपने ही घर में बंधक जैसा महसूस कर रही हैं और हर पल किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठती हैं। पुलिस की इसी घोर लापरवाही ने उन्हें कड़े कदम उठाने पर मजबूर किया।
सूबे के मुखिया ने संभाली कमान और जगाई उम्मीद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीच राह में महिलाओं को रोककर उनकी दर्दभरी दास्तान सुनी और मौके पर मौजूद अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले तत्वों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। पीड़ित परिवार के आंसू पोंछते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें तुरंत 1 लाख रुपये की नकद आर्थिक सहायता स्वीकृत की। इसके साथ ही उन्होंने पूरी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और मामले की सीधी निगरानी के लिए मां-बेटी को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास पर तलब किया है। शासन के इस कड़े रुख से भ्रष्ट तंत्र में हड़कंप मच गया है।
