अंतिम मेडिकल चेकअप की तैयारी
वाइल्डलाइफ डॉक्टरों की टीम अब केवल बाहरी सुधार के आधार पर तेंदुए को स्वस्थ घोषित नहीं करना चाहती। तेंदुए के शरीर के अंदरूनी अंगों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उसका विस्तृत मेडिकल चेकअप किया जाएगा। इसके लिए मेडिकल टीम तेंदुए को ट्रेंकुलाइज यानी बेहोश करने की योजना बना रही है। बेहोश करने के बाद उसके शरीर से खून और अन्य जरूरी फ्लूइड के नमूने लिए जाएंगे। इन सैंपलों की लैब में बारीकी से जांच होगी, जिससे शरीर में वायरस की मौजूदगी का सटीक पता लगाया जा सके।
खतरनाक वायरस से रिकवरी की कोशिश
कैनाइन डिस्टेंपर एक अत्यंत संक्रामक और घातक वायरस है, जिसे वन्य और घरेलू मांसाहारी जीवों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर इस बीमारी से जानवर की जान जाना तय होता है। इसी गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की टीम पिछले कई हफ्तों से तेंदुए की चौबीस घंटे निगरानी कर रही थी। उसकी हर हरकत, खान-पान और दवाओं पर पैनी नजर रखने के कारण ही तेंदुए की सेहत में यह बड़ा सुधार संभव हो सका है।
प्रशासनिक मंजूरी का इंतजार
इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण जांच प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के लिए वन विभाग की कानूनी और प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य है। डॉक्टरों की टीम ने अपनी ओर से सभी कागजी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं और सोमवार को यह फाइल वन विभाग के अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर दी गई है। वहां से लिखित आदेश और मंजूरी मिलते ही वेटरनरी डॉक्टरों की टीम पिंजरे के पास जाकर तेंदुए का ब्लड सैंपल लेने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर देगी।
