कैट ने डीपीसी के फैसले को सीलबंद लिफाफे में रखने को कहा
जबलपुर। केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी कैट ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय, राज्य सरकार और यूपीएससी को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इसके तहत रीवा में तैनात एएसपी संदीप मिश्रा को 25 जून को होने वाली आईपीएस चयन की विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी की बैठक में शामिल करने के लिए कहा गया है। कैट के न्यायिक सदस्य अखिल कुमार श्रीवास्तव और प्रशासनिक सदस्य मल्लिका आर्य की डिवीजन बेंच ने आदेश दिया है कि डीपीसी द्वारा लिए गए निर्णय को फिलहाल सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा जाए। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 अगस्त 2026 की तारीख तय की गई है। यह याचिका राज्य पुलिस सेवा के 1998 बैच के अधिकारी संदीप मिश्रा की तरफ से कोर्ट में पेश की गई थी, जो अभी रीवा में एएसपी के पद पर कार्यरत हैं। याचिका में बताया गया कि संदीप मिश्रा को 8 साल की सेवा पूरी करने के बाद ही आईपीएस अवार्ड के लिए पात्रता मिल गई थी। हालांकि, मध्य प्रदेश में पदों की संख्या कम होने के कारण उनका नाम अब जाकर 2026 की डीपीसी में आया है, जो 25 जून को तय है। अधिवक्ता पंकज दुबे और अक्षय खंडेलवाल ने कोर्ट में दलील दी कि याचिकाकर्ता को एक पुराने मामले में वर्ष 2010 में आरोप पत्र दिया गया था और बाद में वर्ष 2018 में उनकी दो वेतन वृद्धि रोकने की सजा तय की गई थी। इस सजा की वजह से वे आईपीएस के लिए होने वाली इस डीपीसी की दौड़ से बाहर हो रहे थे। कैट की बेंच ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद एएसपी को डीपीसी की प्रक्रिया में शामिल करने का यह आदेश सुनाया है।
