khabar abhi tak

विकसित भारत के निर्माण के लिए जनजातीय समाज का सशक्तिकरण आवश्यक:राष्ट्रपति





राष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों से देशहित को सर्वोपरि रखने की अपील की, ​कुल 142 स्वर्ण पदकों में से 91 पदक बेटियों के नाम रहे

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना जनजातीय समाज के सर्वांगीण उत्थान से ही पूरा हो सकेगा। संस्कारधानी जबलपुर में आयोजित इस गरिमामयी उत्सव में विशिष्ट अतिथि के रूप में कुलाधिपति व राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मेधावी 20 विद्यार्थियों को राष्ट्रपति ने अपने हाथों से मेडल और डिग्रियां प्रदान कीं। इस बार विश्वविद्यालय की उपाधि में इंडिया शब्द के स्थान पर भारत दर्ज किया गया, जो एक बड़ा वैचारिक बदलाव है। समारोह में कुल 142 छात्र-छात्राओं को 240 स्वर्ण पदक, 179 को पीएचडी, 3 को डी.लिट., 1 को डीएससी तथा वरिष्ठ पत्रकार विजय दत्त श्रीधर को कला संकाय में मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

​युवाओं को देशहित में अपनी शिक्षा का उपयोग करना चाहिए

​राष्ट्रपति ने अपने 16 मिनट के व्याख्यान में देश की 65 प्रतिशत युवा आबादी को सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी योग्यता का लाभ केवल व्यक्तिगत तरक्की के लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए उठाना चाहिए। विश्वविद्यालय स्तर पर होने वाले शोध और अनुसंधान कार्य केवल डिग्री लेने तक सीमित नहीं होने चाहिए। उच्च शिक्षण संस्थानों को पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता, दलित उत्थान और स्वच्छता जैसे गंभीर विषयों पर केंद्रित अनुसंधान करने चाहिए ताकि शासन और समाज दोनों को इसका जमीनी लाभ मिल सके। बदलते समय में भी युवाओं को सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अस्तेय और परोपकार जैसे शाश्वत भारतीय मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाना होगा।

​बेटियों की सफलता बदलते हुए सशक्त भारत की नई तस्वीर 

​समारोह के दौरान बांटे गए कुल 142 स्वर्ण पदकों में से 91 पदक छात्राओं के नाम रहे। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि देश तेजी से बदल रहा है। आज देश की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, राजनीति और सामाजिक नेतृत्व के हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। रानी दुर्गावती की 500वीं जन्म जयंती और आगामी 26 जून को उनके 462वें बलिदान दिवस का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें भारतीय नारी शक्ति, अदम्य शौर्य और स्वाभिमान का सबसे बड़ा प्रतीक बताया गया।

​राज्यपाल ने विद्यार्थियों को ग्रामीण परिवेश से जुड़कर समाज सेवा की प्रेरणा दी

​कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा की असली सार्थकता तब है जब युवा अपनी जड़ों को न भूलें। उन्होंने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को पांच-पांच गांव गोद लेने का विशेष सुझाव दिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण अंचलों में भेजकर वहां की वास्तविक और व्यावहारिक परिस्थितियों से रूबरू कराना है। जब युवा ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को समझेंगे, तभी वे समाज के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर सकेंगे। विद्यार्थियों को अपनी सफलता के बाद भी अपने पालन-पोषण करने वाले समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करना चाहिए।

​दो वर्षों में विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक गुणवत्ता और नवाचार में नए कीर्तिमान रचे

​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकल पंजीयन दर 28 प्रतिशत से अधिक होने पर प्रसन्नता जताई। कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि 27 जुलाई 2024 को विश्वविद्यालय को पहली बार नैक द्वारा 'ए' ग्रेड मिला। संस्थान में वर्तमान में बांस शिल्प, हस्तशिल्प, इंटीरियर डिजाइन, मूर्तिकला, सिलाई और ज्वेलरी मेकिंग जैसे रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम चल रहे हैं। डिजाइन इनोवेशन सेंटर को अब तक 10 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है और उसने 6 पेटेंट प्राप्त किए हैं। नीति आयोग ने 2.5 करोड़ रुपये के अनुदान के साथ अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर को मंजूरी दी है। नए सत्र 2024-25 से बीटेक कंप्यूटर, बीएससी और बीकॉम शुरू होने से प्रवेश संख्या दोगुनी हुई है। जुलाई 2025 की पीएचडी प्रवेश परीक्षा के 28 विषयों के परिणाम महज 28 घंटे में जारी कर नया रिकॉर्ड बनाया गया।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak