जबलपुर। विद्युत विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने सोमवार को एक बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस मामले में विद्युत विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रह्लाद मरस्कोले और कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा को 25,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। यह घटना तब सामने आई जब ठेकेदार अशोक कुमार द्विवेदी ने शिकायत की कि उनका 10 लाख रुपये का भुगतान अटका हुआ है।
किस बात के लिए चाहिए थी रिश्वत
अशोक कुमार द्विवेदी के अनुसार, कटनी जिले में जूनियर इंजीनियर कार्यालय के निर्माण कार्य के भुगतान के लिए ये अधिकारी लंबे समय से घूस की मांग कर रहे थे। चंद्रशेखर मेहरा ने 20,000 रुपये और प्रह्लाद मरस्कोले ने 30,000 रुपये की मांग की थी, जिसमें से मेहरा पहले ही 5,000 रुपये ले चुके थे। सोमवार को जब ठेकेदार रिश्वत की दूसरी किस्त लेकर पहुंचा, तो ईओडब्ल्यू ने पहले से तैयार योजना के तहत उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(ए) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
