जबलपुर। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के तहत आने वाली आम जनता की शिकायतों के निपटारे को लेकर नगर निगम बेहद गंभीर हो गया है। निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने निगम मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली, जिसमें लंबित मामलों की विभागवार प्रगति जांची गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर आयुक्त, उपायुक्त, अधीक्षण यंत्री, स्वास्थ्य अधिकारी और सभी विभागों के कार्यपालन यंत्री सहित समस्त जोनल अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि जन-समस्याओं का समय-सीमा के भीतर निराकरण करना शासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को दफ्तरों से बाहर निकलकर सीधे जमीन पर काम करने के कड़े निर्देश दिए ताकि शहरवासियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े। लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त विभागीय एक्शन लिया जाएगा।
फाइलों के बजाय अब जमीन पर दिखेगा शिकायतों का समाधान
श्री अहिरवार ने बैठक के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि विभागीय प्रमुख और जोनल अधिकारी अब केवल दफ्तर में बैठकर मॉनिटरिंग नहीं करेंगे। उन्हें खुद फील्ड में उतरकर अपनी उपस्थिति में काम करवाना होगा। मौके पर वरिष्ठ अधिकारियों के रहने से प्रशासनिक कार्यों में पूरी पारदर्शिता आएगी और जनता की रोजमर्रा की समस्याओं का स्थाई हल निकाला जा सकेगा। विशेष रूप से निर्माण कार्य, पानी की सप्लाई, सीवरेज लाइन और साफ-सफाई से जुड़ी शिकायतों को पूरी तकनीकी बारीकी के साथ दुरुस्त करने को कहा गया है ताकि नागरिकों को एक ही समस्या के लिए बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें।
समय पर काम न होने पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
बैठक में विभिन्न विभागों में एल-1, एल-2, एल-3 और एल-4 स्तर पर रुके हुए मामलों की गहन समीक्षा की गई। निगमायुक्त ने सभी प्रभारियों को एक तय समय-सीमा के भीतर वैध शिकायतों को बंद करने के आदेश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना किसी ठोस और उचित कारण के अगर कोई भी फाइल अटकी रही, तो सीधे संबंधित अधिकारी को जिम्मेदार माना जाएगा और उनके सेवा रिकॉर्ड के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सीएम हेल्पलाइन को शासन की सबसे संवेदनशील प्रणाली बताते हुए उन्होंने जबलपुर के नागरिकों को एक जवाबदेह, पारदर्शी और साफ-सुथरी प्रशासनिक व्यवस्था देने का संकल्प दोहराया।
