डिजिटल क्रांति: पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली तंत्र को स्मार्ट बनाने के लिए अधिकारियों को दी एआई और मशीन लर्निंग की ट्रेनिंग, बिजली सुधार के लिए तैयार किए गए खास एआई मॉडल
जबलपुर। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए आयोजित चार दिवसीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग प्रशिक्षण कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन 19 जून को हुआ। इस बेहद महत्वपूर्ण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विभाग के कर्मचारियों की कार्यक्षमता को बढ़ाना और बिजली वितरण में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना था। समापन के विशेष सत्र में कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस एसके निगम, मुख्य महाप्रबंधक कार्य और आरडीएसएस. एसके भागवतकर और मुख्य महाप्रबंधक आईटी प्रशांत गुप्ता प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इस चार दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विभाग के तकनीकी अमले को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार किया गया। तकनीकी सत्रों के दौरान कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग, लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स, आरएजी आधारित चैटबॉट, जीपीयू आधारित प्रोसेसिंग, जीआईएस और स्मार्ट मीटर डेटा एनालिटिक्स जैसे जटिल और आधुनिक विषयों की व्यावहारिक जानकारी दी गई। कार्यशाला में अलग-अलग विभागों की संयुक्त टीमें बनाई गईं। इन टीमों ने मिलकर ओएंडएम, कमर्शियल, आईटी, जीआईएस, स्मार्ट मीटरिंग और आरडीएसएस से जुड़े डेटा का गहराई से अध्ययन किया। इस सामूहिक प्रयास से बिजली विभाग की वास्तविक कामकाजी समस्याओं को सुलझाने के लिए नए रास्ते खोजे गए।
आधुनिक तकनीक से सुधरेगी उपभोक्ता सेवाएं, रुकेगी बिजली चोरी
प्रशिक्षण पाने वाले अधिकारियों ने बिजली विभाग के कामकाज को आसान बनाने के लिए कई व्यावहारिक मॉडल खुद तैयार किए। इनमें बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का तुरंत विश्लेषण करने, बिजली चोरी पकड़ने, अनुमान विसंगति की जांच करने और फीडर लॉस का पता लगाने वाले सिस्टम शामिल हैं। इसके साथ ही कर्मचारियों ने जीआईएस आधारित निर्णय सहयोग प्रणाली, स्मार्ट मीटर डेटा विश्लेषण और एक आधुनिक चैटबॉट भी विकसित किया है। इस पूरे आयोजन का मुख्य लक्ष्य आधुनिक तकनीकों के सहारे उपभोक्ता सेवाओं को पहले से कहीं ज्यादा बेहतर और तेज बनाना है। नई व्यवस्था से शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत होगी और बिजली के नुकसान को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि डेटा पर आधारित फैसलों से पूरी बिजली वितरण प्रणाली को एक स्मार्ट, प्रोएक्टिव और उपभोक्ता-केंद्रित संस्था के रूप में बदला जा सकता है।
