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गोलबाजार जमीन विवाद: कब्जेदारों को हाई कोर्ट से झटका, हटाने की कार्रवाई रहेगी जारी

 


जबलपुर। शहर के गोलबाजार इलाके में स्थित 12,800 वर्गफीट की बेशकीमती सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस कार्रवाई के विरोध में दायर की गई नई याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से कब्जेदारों को कोई राहत नहीं मिल सकी है। जस्टिस प्रणय वर्मा और जस्टिस जेके पिल्लई की संयुक्त खंडपीठ ने मामले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ मना कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे प्रकरण की सुनवाई अब पुरानी मूल बेंच के सामने ही की जाएगी, जिसके लिए आने वाली 19 जून की तारीख तय की गई है।

​पुरानी बेंच के पास वापस लौटा पूरा कानूनी मामला

​इस जमीनी विवाद की जड़ें गोलबाजार के रहने वाले जयदीप शाह की उस जनहित याचिका से जुड़ी हैं, जिसमें उन्होंने 12,800 वर्गफीट शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने की मांग उठाई थी। इसके बाद मामले में अमित जैन बतौर हस्तक्षेपकर्ता शामिल हुए। अमित जैन के वकील सतीश वर्मा की दलीलों को आधार मानते हुए हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 15 मई को कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को कड़ी फटकार लगाते हुए जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने दोनों आला अफसरों को 22 जून तक जमीन खाली कराने की समयसीमा दे रखी है।

​निगम के कड़े नोटिस के बाद सीधे अदालत पहुंचा पार्षद परिवार

​अदालती आदेश के बाद नगर निगम प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। निगम के वकील सौरभ सुंदर ने कोर्ट में बताया कि जमीन पर काबिज तमाम लोगों को नोटिस थमा दिए गए हैं। इन सभी को अपने मालिकाना हक और मकान निर्माण की मंजूरी के सरकारी दस्तावेज पेश करने के लिए सिर्फ तीन दिन की मोहलत दी गई है। इस बड़ी कार्रवाई के डर से बुधवार को स्थानीय पार्षद अयोध्या तिवारी, शकुन तिवारी, आनंद तिवारी और राजेश तिवारी ने कोर्ट की शरण ली थी। इन्होंने याचिका दायर कर पूरी बेदखली प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी।

​अब 19 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी नजरें

​तिवारी परिवार की इस नई याचिका का विरोध करते हुए विपक्षी वकील सतीश वर्मा ने दलील दी कि सरकारी जमीन को किसी भी कीमत पर खाली कराया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, याचिकाकर्ताओं के वकील प्रियंकुश जैन ने अपने मुवक्किलों के बचाव में दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने साफ कर दिया कि वे इस स्तर पर कोई दखल नहीं देंगे और मामला मूल बेंच ही सुनेगी। इस फैसले के बाद अब प्रशासनिक अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं और 19 जून तक निगम की जांच और कागजों का मिलान तेजी से चलता रहेगा।

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